मिडिल-ईस्ट में हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। ईरान और अमेरिका के बीच टकराव अब खुले संघर्ष की ओर बढ़ता दिख रहा है। दोनों देशों की बयानबाजी और सैन्य गतिविधियां इस बात का संकेत दे रही हैं कि हालात कभी भी युद्ध में बदल सकते हैं। होर्मुज स्ट्रेट और अरब सागर के इलाके में तनाव चरम पर है, जहां रणनीतिक गतिविधियां बढ़ गई हैं।
अमेरिका के संभावित टारगेट क्या हैं
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने ईरान के खिलाफ कई बड़े टारगेट तय किए हैं। इनमें यूरेनियम भंडार, मिसाइल ठिकाने, तेल संसाधन और होर्मुज पर नियंत्रण शामिल हैं। माना जा रहा है कि अगर हमला होता है तो यह सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर बड़े स्तर पर देखने को मिल सकता है। अमेरिका इस बार निर्णायक कार्रवाई के मूड में दिख रहा है।
ईरान का पलटवार प्लान तैयार
दूसरी तरफ ईरान ने भी साफ कर दिया है कि वह पीछे हटने वाला नहीं है। उसने अमेरिका के नेवल फ्लीट को निशाना बनाने की रणनीति बनाई है। अंडरवॉटर ड्रोन, छोटे जहाज और कार्गो शिप से मिसाइल लॉन्च जैसे नए तरीकों पर काम किया जा रहा है। ईरान की रणनीति साफ है- सीधे टकराव से अमेरिका को भारी नुकसान पहुंचाना।
तीन तरफा हमले की रणनीति
ईरान इस बार एक साथ कई मोर्चों पर हमला करने की तैयारी में है। पहला निशाना इजराइल हो सकता है, दूसरा अरब सागर में मौजूद अमेरिकी सेना और तीसरा कुछ अरब देशों के सैन्य ठिकाने। यह रणनीति पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक सकती है। इससे न सिर्फ सैन्य बल्कि आर्थिक संकट भी गहरा सकता है।
ग्राउंड ऑपरेशन का बड़ा खतरा
अमेरिका का एक बड़ा लक्ष्य ईरान के यूरेनियम भंडार पर कब्जा करना बताया जा रहा है। इसके लिए ग्राउंड ऑपरेशन की योजना भी चर्चा में है, जिसमें कमांडो मिशन और एयर स्ट्राइक शामिल हो सकते हैं। हालांकि यह ऑपरेशन आसान नहीं होगा, क्योंकि ईरान की सुरक्षा व्यवस्था और भौगोलिक स्थिति इसे बेहद जटिल बना देती है।
पूरे क्षेत्र पर संकट के बादल
इस बढ़ते तनाव का असर सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा। पूरे मिडिल-ईस्ट में अस्थिरता फैल सकती है। अरब सागर, होर्मुज और तेल सप्लाई रूट्स पर खतरा मंडरा रहा है। अगर युद्ध शुरू होता है तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और शांति पर भी पड़ेगा। फिलहाल दुनिया की नजरें इस टकराव पर टिकी हुई हैं।