हिंदू धर्म में शंख का बहुत खास महत्व माना जाता है। पूजा, आरती और हर शुभ कार्य की शुरुआत शंख की ध्वनि से करने की परंपरा सदियों पुरानी है। माना जाता है कि इसकी आवाज से वातावरण शुद्ध होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। यही कारण है कि अधिकतर घरों के पूजा स्थल में शंख जरूर रखा जाता है और इसे शुभता का प्रतीक माना जाता है।
दो शंख रखने की परंपरा
बहुत कम लोग जानते हैं कि पूजा घर में एक नहीं, बल्कि दो शंख रखने की परंपरा है। एक शंख केवल बजाने के लिए होता है, जबकि दूसरा पूजा में उपयोग किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जिस शंख को फूंका जाता है, उसमें सांस के कारण अशुद्धि आ जाती है। इसलिए उसे पूजा में इस्तेमाल नहीं किया जाता। पूजन वाला शंख अलग और पूरी तरह पवित्र रखा जाता है।
पूजन शंख और उसके फायदे
पूजा में इस्तेमाल होने वाला शंख बेहद पवित्र माना जाता है। इसमें जल भरकर भगवान को अर्पित करना बहुत शुभ होता है। मान्यता है कि इस जल का प्रभाव माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कृपा से जुड़ा होता है। इससे घर में सुख-समृद्धि और शांति आती है। वहीं शंख बजाने से भी सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और मन को शांति मिलती है।
सही रखने की विधि और नियम
शंख रखने के कुछ खास नियम भी होते हैं। बजाने वाले शंख को साफ सफेद कपड़े पर रखना चाहिए, जबकि पूजा वाले शंख को पीतल या तांबे के स्टैंड में चावल भरकर रखना शुभ माना जाता है। ध्यान रखें कि दोनों शंख एक-दूसरे को छूएं नहीं। अगर एक ही शंख को बजाने और पूजा दोनों के लिए इस्तेमाल किया जाए, तो पूजा की शुद्धता प्रभावित हो सकती है। इसलिए शास्त्रों में दोनों को अलग रखने की सलाह दी गई है।