नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ सैलरीड लोगों के सामने वही पुराना सवाल खड़ा हो गया है- पुराना टैक्स सिस्टम चुनें या नया? हर साल की तरह इस बार भी कई लोग इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि कौन-सा विकल्प ज्यादा फायदेमंद रहेगा। सही चुनाव पूरी तरह आपकी इनकम, खर्च और निवेश पर निर्भर करता है, इसलिए बिना समझे फैसला लेना नुकसानदेह हो सकता है।
नया टैक्स सिस्टम: आसान और कम दरें
नया टैक्स सिस्टम पिछले कुछ सालों में काफी लोकप्रिय हुआ है। इसकी सबसे बड़ी खासियत है कम टैक्स रेट और आसान प्रक्रिया। FY 2026-27 में अगर आपकी टैक्सेबल इनकम 12 लाख रुपये तक है, तो आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा। साथ ही सैलरीड लोगों को 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है, जिससे 12.75 लाख रुपये तक की सैलरी टैक्स फ्री हो सकती है। इसमें मील वाउचर, कंपनी कार और NPS में एम्प्लॉयर योगदान जैसे कुछ अतिरिक्त फायदे भी मिलते हैं।
पुराना सिस्टम: ज्यादा छूट का फायदा
पुराना टैक्स सिस्टम उन लोगों के लिए बेहतर है, जो ज्यादा निवेश और टैक्स छूट का लाभ लेते हैं। इसमें 5 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स फ्री होती है और 50,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है। इसके अलावा HRA, होम लोन ब्याज, सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख तक का निवेश, हेल्थ इंश्योरेंस और एजुकेशन लोन जैसी कई छूट मिलती हैं। अगर आप इन सभी डिडक्शन का सही इस्तेमाल करते हैं, तो आपकी टैक्स बचत ज्यादा हो सकती है।
कैसे करें सही चुनाव
टैक्स एक्सपर्ट के अनुसार, कोई भी फैसला लेने से पहले दोनों सिस्टम में अपनी टैक्स देनदारी का हिसाब लगाना जरूरी है। अगर आप ज्यादा निवेश नहीं करते, तो नया सिस्टम आपके लिए आसान और फायदेमंद रहेगा। वहीं, अगर आप HRA, इंश्योरेंस और लोन जैसी छूट का पूरा लाभ लेते हैं, तो पुराना सिस्टम बेहतर हो सकता है। सही विकल्प चुनने के लिए अपनी फाइनेंशियल स्थिति को समझना बेहद जरूरी है।