अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच दूसरे दौर की बातचीत पर अब भी सस्पेंस बना हुआ है। इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता को लेकर स्थिति साफ नहीं है। पहले उम्मीद थी कि बातचीत से तनाव कम होगा, लेकिन हालात उलट होते नजर आ रहे हैं। ईरान ने अभी तक वार्ता के लिए पूरी तरह सहमति नहीं दी है, जिससे शांति की उम्मीद कमजोर पड़ती दिख रही है।
हमले से बिगड़ा माहौल
डोनाल्ड ट्रंप ने पहले बातचीत की पहल की थी और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को पाकिस्तान भेजने की बात कही थी। लेकिन इसी बीच ईरानी कार्गो शिप पर अमेरिकी कार्रवाई ने हालात को और तनावपूर्ण बना दिया। इस घटना के बाद अब सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान इस बातचीत में शामिल होगा या नहीं। इससे बातचीत की पूरी प्रक्रिया पर असर पड़ा है।
धमकियां और सख्त रुख
दोनों देशों के बीच बयानबाजी भी तेज हो गई है। डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा कि अगर ईरान समझौता नहीं करता, तो उसे कड़े कदमों के लिए तैयार रहना होगा। वहीं ईरान ने भी सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि दबाव में बातचीत स्वीकार नहीं की जाएगी। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर कलीबाफ ने कहा कि अमेरिका बातचीत को सरेंडर बनाना चाहता है, जो मंजूर नहीं है।
तनाव के बीच अनिश्चित भविष्य
IRGC के सख्त रुख और अमेरिकी नाकाबंदी के कारण बातचीत में देरी हो रही है। ईरान की तरफ से शर्तें कम करने और नाकाबंदी हटाने की मांग की जा रही है। वहीं समंदर में अमेरिकी सैन्य तैयारियां भी बढ़ रही हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि बातचीत होगी या नहीं, लेकिन तनाव कम होने के संकेत अभी दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहे हैं।