Akshaya Tritiya पर सोना जरूरी नहीं! इन सस्ती चीजों से भी मिलेगा धन लाभ, जानिए शुभ मुहूर्त और खास मान्यताएं

सनातन धर्म में अक्षय तृतीया को बेहद शुभ और पवित्र दिन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए शुभ कार्यों का फल कभी खत्म नहीं होता। यही वजह है कि लोग इस दिन नए काम, निवेश और खरीदारी करना पसंद करते हैं। इसे “अबूझ मुहूर्त” भी कहा जाता है, यानी इस दिन शुभ कामों के लिए अलग से मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं होती।

क्या सोना खरीदना ही जरूरी है?

अक्सर लोग मानते हैं कि अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना जरूरी है, तभी लक्ष्मी कृपा मिलती है। लेकिन शास्त्रों में ऐसा कहीं अनिवार्य नहीं बताया गया। अगर आप सोना नहीं खरीद पाते, तो चिंता की बात नहीं है। इस दिन श्रद्धा और आस्था ज्यादा मायने रखती है, न कि महंगी खरीदारी।

सस्ती चीजें जो देती हैं बड़ा लाभ

अगर बजट कम है, तो आप धनिया के बीज खरीद सकते हैं। इसे माता लक्ष्मी को अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा मिट्टी या तांबे के बर्तन भी खरीदे जा सकते हैं। ये चीजें घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लाने का प्रतीक मानी जाती हैं।

मिट्टी के बर्तन का खास महत्व

वास्तु और ज्योतिष के अनुसार, अक्षय तृतीया पर मिट्टी का बर्तन खरीदना बहुत शुभ होता है। इसमें गंगाजल भरकर घर में रखने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। साथ ही यह कर्ज से राहत पाने में भी सहायक माना जाता है।

कम बजट में भी करें शुभ खरीदारी

अगर आप ज्यादा खर्च नहीं करना चाहते, तो चावल, घी या लाल वस्त्र खरीद सकते हैं। ये सभी चीजें शुभ मानी जाती हैं। इस दिन लक्ष्मी-नारायण की पूजा के साथ इन वस्तुओं को घर लाने से आर्थिक परेशानियां धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं।

सोना खरीदने का शुभ समय

इस साल अक्षय तृतीया 19 अप्रैल को मनाई जाएगी। सोना खरीदने का शुभ समय सुबह 10:49 बजे से अगले दिन सुबह तक रहेगा। हालांकि शाम के समय खरीदारी को ज्यादा लाभकारी माना गया है। लेकिन याद रखें, खरीदारी आपकी क्षमता के अनुसार ही होनी चाहिए।

अक्षय तृतीया की ऐतिहासिक मान्यताएं

पुराणों के अनुसार, इस दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं हुई थीं। माता गंगा का अवतरण इसी दिन हुआ था। साथ ही भगवान परशुराम का जन्म भी अक्षय तृतीया पर ही माना जाता है। यह दिन सतयुग और त्रेतायुग की शुरुआत से भी जुड़ा हुआ है।

पौराणिक घटनाएं जो बनाती हैं दिन खास

मान्यता है कि इस दिन पांडवों को अक्षय पात्र मिला था, जो कभी खाली नहीं होता था। इसी दिन महाभारत युद्ध समाप्त हुआ और ग्रंथ लेखन की शुरुआत भी हुई। यही कारण है कि यह दिन हर तरह से शुभ और फलदायी माना जाता है।

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Author: The Hindi Post