लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन बिल पर दो दिन तक लंबी बहस चली, लेकिन आखिरकार यह पास नहीं हो सका। चूंकि यह संविधान संशोधन बिल था, इसलिए इसे पास करने के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी था। वोटिंग के दौरान यह समर्थन नहीं मिल पाया और बिल गिर गया।
परिसीमन मुद्दे पर बढ़ा विवाद
विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने महिला आरक्षण के साथ परिसीमन से जुड़ा बिल भी जोड़ दिया। इस बिल में लोकसभा सीटों को बढ़ाकर करीब 850 करने का प्रस्ताव था। विपक्ष का कहना था कि इससे दक्षिण भारत के राज्यों को नुकसान होगा और उनकी सीटें कम हो सकती हैं।
सरकार और विपक्ष आमने-सामने
बहस के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष को पुराने महिला आरक्षण बिल से कोई दिक्कत नहीं है। वहीं अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा कि हर राज्य की सीटें समान रूप से बढ़ाई जाएंगी।
महिला आरक्षण पर फिलहाल रोक
इस बिल के तहत संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित होनी थीं, लेकिन अब यह कानून फिलहाल लागू नहीं हो पाएगा। विपक्ष के विरोध और राजनीतिक मतभेदों के कारण यह महत्वपूर्ण प्रस्ताव अधर में लटक गया है।