यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों में बाहर से आने वाले लोगों को लेकर माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। स्थानीय लोगों में यह भावना बढ़ रही है कि बड़ी संख्या में विदेशी वहां बस रहे हैं। इस वजह से कई राजनीतिक दल और आंदोलन खड़े हो गए हैं, जिनका असर भारतीयों पर भी पड़ रहा है, भले ही वे काम के लिए ही वहां गए हों।
भारतीयों पर भी पड़ रहा असर
भारतीय आमतौर पर आईटी, मेडिकल और प्रोफेशनल सेक्टर में काम करने के लिए विदेश जाते हैं और अर्थव्यवस्था में योगदान देते हैं। लेकिन आम लोगों के बीच विदेशी विरोधी माहौल बनने से भारतीयों को भी उसी नजर से देखा जाने लगा है। कई बार पहचान करना मुश्किल होता है, जिससे सभी दक्षिण एशियाई एक साथ प्रभावित होते हैं।
फर्जी शरण के पुराने तरीके
रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ लोग शरण पाने के लिए पहले अलग-अलग तरीके अपनाते थे। जैसे खुद को धर्म छोड़ने वाला बताना, राजनीतिक उत्पीड़न का दावा करना या नकली मेडिकल रिकॉर्ड दिखाना। इन तरीकों से वे यह साबित करने की कोशिश करते थे कि अपने देश लौटने पर उन्हें खतरा है।
नया तरीका: फर्जी पहचान का खेल
अब एक नया तरीका सामने आया है, जिसमें कुछ लोग खुद को समलैंगिक बताकर शरण मांग रहे हैं। कानून के अनुसार, अगर किसी को अपने देश में यौन पहचान के कारण खतरा है, तो उसे शरण मिल सकती है। इसी का फायदा उठाकर एजेंट झूठे केस तैयार कर रहे हैं और लोगों को इस आधार पर रहने का मौका दिलाने की कोशिश कर रहे हैं।
एजेंट और नेटवर्क का पूरा सिस्टम
इस पूरे मामले में एजेंट और वकीलों का नेटवर्क काम करता है, जो पैसे लेकर पूरी कहानी तैयार करते हैं। इसमें सोशल मीडिया पोस्ट, फर्जी दस्तावेज, इवेंट में भागीदारी और मेडिकल रिकॉर्ड तक शामिल होते हैं। इन सबका मकसद सिर्फ एक ही होता है- किसी भी तरह शरण हासिल करना।
सरकार सख्त, जांच तेज
अब ब्रिटेन सरकार इस तरह के मामलों को गंभीरता से ले रही है। जांच कड़ी कर दी गई है और फर्जी दावों को खारिज किया जा रहा है। ऐसे मामलों में लोगों को डिपोर्ट भी किया जा सकता है। इस पूरी स्थिति ने वहां के समाज और राजनीति में बड़ा मुद्दा खड़ा कर दिया है।