बालेन शाह 35 साल की उम्र में नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने हैं। पद संभालते ही उन्होंने 100 प्वाइंट का गुड गवर्नेंस प्लान पेश किया है। उनका मकसद सिर्फ सरकार चलाना नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम को बदलना है। अगर ये प्लान सफल होता है, तो इसका असर दूसरे दक्षिण एशियाई देशों पर भी पड़ सकता है।
सरकारी नौकरी और राजनीति अलग
नई नीति के तहत अब कोई भी सरकारी कर्मचारी, अफसर, शिक्षक या प्रोफेसर किसी राजनीतिक पार्टी से नहीं जुड़ सकता। अगर कोई राजनीति करना चाहता है तो उसे नौकरी छोड़नी होगी। इतना ही नहीं, सरकारी यूनियन भी किसी राजनीतिक दल से जुड़ी नहीं होंगी। यह कदम प्रशासन को निष्पक्ष बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
छात्र और शिक्षक यूनियन पर भी रोक
सरकार ने कॉलेज और यूनिवर्सिटी स्तर पर भी बड़ा फैसला लिया है। अब छात्र संघ और शिक्षक यूनियन किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़ी नहीं होंगी। दक्षिण एशिया में यह पहली बार हो रहा है, जहां शिक्षा संस्थानों को राजनीति से पूरी तरह अलग करने की कोशिश की जा रही है।
VIP कल्चर पर सख्त प्रहार
बालेन शाह ने VIP कल्चर को खत्म करने के लिए भी सख्त कदम उठाए हैं। अब किसी मंत्री, नेता या अधिकारी के लिए सड़कें खाली नहीं करवाई जाएंगी। न सायरन बजेगा और न ही खास सुविधाएं मिलेंगी। सभी को आम नागरिकों की तरह ही नियमों का पालन करना होगा।
सरकारी स्कूलों पर बड़ा फैसला
सबसे बड़ा और अनोखा फैसला शिक्षा को लेकर लिया गया है। अब सभी नेताओं, मंत्रियों और अधिकारियों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ना होगा। इससे उम्मीद है कि सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता खुद-ब-खुद सुधरेगी, क्योंकि नीति बनाने वाले खुद उससे जुड़े होंगे।
आलोचना और उम्मीदें साथ-साथ
हालांकि इन फैसलों की तारीफ हो रही है, लेकिन आलोचना भी कम नहीं है। कुछ लोगों का मानना है कि राजनीति में समझौते जरूरी होते हैं और ये फैसले लागू करना आसान नहीं होगा। फिर भी अगर बालेन शाह अपने प्लान को सफल कर लेते हैं, तो उनका नाम नेपाल के इतिहास में बड़े बदलाव लाने वाले नेता के रूप में दर्ज हो सकता है।