सांस फूलना कई बार दिल या फेफड़ों से जुड़ी समस्या का संकेत होता है। जब दिल सही तरीके से खून पंप नहीं करता, तो शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती। इसी तरह, फेफड़ों में दिक्कत होने पर ऑक्सीजन लेना मुश्किल हो जाता है। अस्थमा, संक्रमण या अन्य फेफड़ों की बीमारी में खांसी, घरघराहट और सीने में जकड़न भी महसूस हो सकती है।
खून की कमी और कमजोरी का असर
अगर शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया हो, तो ऑक्सीजन पूरे शरीर तक नहीं पहुंच पाती। इसका असर सांस पर सीधा पड़ता है। थोड़ा सा काम करने पर थकान, चक्कर आना और सांस फूलना आम लक्षण हैं। इसे अक्सर लोग कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर समस्या बढ़ा सकता है।
मोटापा और थायरॉयड भी जिम्मेदार
अधिक वजन होने से शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे सांस लेने में कठिनाई होती है। छाती और फेफड़ों पर दबाव बढ़ने से थोड़ी मेहनत में ही सांस फूलने लगती है। इसके अलावा थायरॉयड हार्मोन का असंतुलन भी दिल की धड़कन तेज कर देता है, जिससे सांस लेने में परेशानी महसूस हो सकती है।
कब समझें कि मामला गंभीर है
अगर आराम करने पर भी सांस फूल रही है, सीने में दर्द हो रहा है या होंठ नीले पड़ रहे हैं, तो इसे हल्के में न लें। लगातार खांसी, खून आना या अचानक कमजोरी महसूस होना भी खतरे का संकेत है। ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है, ताकि समय रहते सही इलाज मिल सके।