संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच शनिवार को इस्लामाबाद में अहम बातचीत शुरू हुई। दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के बीच करीब दो घंटे तक आमने-सामने चर्चा हुई। यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने अब तक तीन बड़े मुद्दों पर नरमी दिखाई है, जिससे बातचीत आगे बढ़ने की उम्मीद जगी है।
ईरान ने बदली अपनी रणनीति
पहले ईरान की नीति थी कि वह अमेरिका से सीधे बातचीत नहीं करेगा, लेकिन हालात को देखते हुए उसे इस रुख में बदलाव करना पड़ा। जेडी वेंस के इस्लामाबाद पहुंचने के बाद ईरान ने डायरेक्ट बातचीत के लिए हामी भर दी। हालांकि, बातचीत से पहले रखी गई उसकी दो शर्तों को अमेरिका ने पूरी तरह नहीं माना, फिर भी ईरान ने लचीला रुख अपनाया है।
सीजफायर और रियायतों पर फोकस
इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य तनाव कम करना और सीजफायर को मजबूत करना है। डोनाल्ड ट्रंप को भी हर पल की जानकारी दी जा रही है और अहम फैसलों पर उनसे सलाह ली जा रही है। माना जा रहा है कि ईरान कुछ मुद्दों पर समझौता कर सकता है, बदले में उसे कुछ राहत मिल सकती है। ईरान यह भी नहीं चाहता कि अमेरिकी उप राष्ट्रपति खाली हाथ लौटें, इसलिए बातचीत में प्रगति की संभावना बनी हुई है।
जंग का असर और बढ़ता दबाव
इस संघर्ष का असर कई देशों पर पड़ा है। Israel और लेबनान में लगातार हमलों से हजारों लोगों की जान जा चुकी है। वहीं, खाड़ी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। ऊर्जा की कीमतें बढ़ गई हैं और कई देशों का इंफ्रास्ट्रक्चर नुकसान झेल रहा है। ऐसे में पूरी दुनिया की नजर इस बातचीत पर टिकी है, ताकि किसी स्थायी समाधान की दिशा में कदम बढ़ सके।