सनातन धर्म में एकादशी व्रत को बेहद पवित्र माना गया है, जो भगवान विष्णु को समर्पित होता है। वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष में आने वाली वरुथिनी एकादशी विशेष फलदायी मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
तिथि और व्रत पारण समय
पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 12 अप्रैल की रात 01:16 बजे शुरू होकर 14 अप्रैल की रात 01:08 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर व्रत 13 अप्रैल 2026 को रखा जाएगा। व्रत का पारण 14 अप्रैल को सुबह 06:54 बजे से 08:31 बजे के बीच किया जा सकता है। सही समय पर पारण करना व्रत का पूरा फल प्राप्त करने के लिए जरूरी माना गया है।
पंचक का साया और प्रभाव
इस बार वरुथिनी एकादशी पर पंचक का भी प्रभाव रहेगा। पंचक की शुरुआत 13 अप्रैल सुबह 03:44 बजे से होगी और 17 अप्रैल दोपहर 12:02 बजे तक रहेगी। सोमवार से शुरू होने के कारण इसे राज पंचक कहा जाता है। पंचक में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं, लेकिन पूजा-पाठ और व्रत करने पर कोई रोक नहीं होती।
इन कामों से मिलेगा पुण्य फल
इस दिन पूरे विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करें और व्रत रखें। साथ ही दान-पुण्य करना बेहद शुभ माना जाता है। जल से भरे घड़े का दान करें, जरूरतमंदों को भोजन कराएं और सूती वस्त्र दें। इन कार्यों से कई गुना पुण्य फल मिलता है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।