आज के समय में LDL कोलेस्ट्रॉल यानी बैड कोलेस्ट्रॉल तेजी से बढ़ती समस्या बन चुका है। यह दिल की बीमारियों का खतरा काफी बढ़ा देता है। गलत खानपान, एक्सरसाइज की कमी और बढ़ता तनाव इसके मुख्य कारण माने जाते हैं। ऐसे में लोग इसे कंट्रोल करने के लिए दवाइयों के साथ सप्लीमेंट्स का सहारा लेने लगे हैं।
फिश ऑयल को लेकर नई गाइडलाइन
2026 की नई गाइडलाइन में साफ किया गया है कि ओवर-द-काउंटर मिलने वाले फिश ऑयल कैप्सूल LDL को कम करने में असरदार नहीं हैं। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन और अमेरिकन कॉलेज ऑफ़ कार्डियोलॉजी के एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि इन्हें इलाज के तौर पर लेना सही नहीं है। इससे लोगों में गलतफहमी बढ़ रही है।
LDL पर असर क्यों नहीं करता
फिश ऑयल का मुख्य काम शरीर में ट्राइग्लिसराइड्स को कम करना होता है, जो एक तरह का फैट है। लेकिन LDL को कम करने में इसका खास योगदान नहीं होता। कुछ रिसर्च में यह भी पाया गया है कि कुछ लोगों में इसका सेवन करने से LDL बढ़ भी सकता है, जिससे जोखिम और बढ़ जाता है।
सिर्फ सप्लीमेंट पर निर्भरता खतरनाक
एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ सप्लीमेंट्स पर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है। इससे लोग सही इलाज से दूर हो जाते हैं और समस्या बढ़ सकती है। दिल की बीमारियों से बचाव के लिए सही जानकारी और वैज्ञानिक सलाह अपनाना बेहद जरूरी है, न कि सिर्फ ट्रेंड के आधार पर फैसले लेना।
LDL कम करने का सही तरीका
बैड कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने के लिए दवाइयों, संतुलित आहार और नियमित एक्सरसाइज का संयोजन सबसे असरदार माना जाता है। डाइट में फल, सब्जियां, फाइबर और हेल्दी फैट्स शामिल करना जरूरी है। साथ ही तली-भुनी और जंक फूड से दूरी बनाना और रोजाना कम से कम 30 मिनट की फिजिकल एक्टिविटी करना फायदेमंद होता है।
डॉक्टर की सलाह जरूरी क्यों
बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी सप्लीमेंट लेना नुकसानदायक हो सकता है। हर व्यक्ति की शरीर की जरूरत अलग होती है, इसलिए खुद से इलाज करना सही नहीं है। फिश ऑयल जैसे सप्लीमेंट्स को लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है, ताकि सही इलाज मिल सके और किसी भी तरह का खतरा टाला जा सके।