देशभर में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को अनिवार्य किए जाने के फैसले के खिलाफ शिक्षकों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। अब यह आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच चुका है और 4 अप्रैल को बड़ी संख्या में शिक्षक दिल्ली के रामलीला मैदान में जुटकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। इस प्रदर्शन का नेतृत्व टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI) कर रहा है। अलग-अलग राज्यों में हो चुके प्रदर्शनों के बाद अब शिक्षक अपनी आवाज केंद्र सरकार तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।
फेडरेशन की मुख्य मांगें
टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया का कहना है कि यह प्रदर्शन सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध तक सीमित नहीं है। संगठन केंद्र सरकार से मांग कर रहा है कि वह एक नया कानून बनाकर इस फैसले के प्रभाव को खत्म करे। फेडरेशन के अनुसार, अगर सरकार ऐसा कदम उठाती है तो देशभर के लगभग 20 लाख शिक्षकों को राहत मिल सकती है। उनका मानना है कि यह फैसला शिक्षकों के साथ अन्याय कर रहा है और उनकी नौकरी को अस्थिर बना रहा है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्या है
करीब छह महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम निर्णय देते हुए TET परीक्षा को अनिवार्य कर दिया था। यह नियम शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून के तहत लागू किया गया है। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, सभी शिक्षकों को 1 सितंबर 2027 तक TET पास करना जरूरी है। यदि कोई शिक्षक इस समय सीमा में परीक्षा पास नहीं करता है, तो उसे हर साल मिलने वाली अतिरिक्त वेतन वृद्धि से वंचित कर दिया जाएगा और उसकी नौकरी पर भी खतरा आ सकता है।
किसे मिलेगी छूट
इस फैसले में कुछ शिक्षकों को राहत भी दी गई है। जिन शिक्षकों की सेवा अवधि 5 साल से कम बची है, उन्हें TET पास करने की अनिवार्यता से छूट दी गई है। हालांकि, ऐसे शिक्षकों को प्रमोशन का लाभ नहीं मिलेगा। बावजूद इसके, बड़ी संख्या में शिक्षक इस नियम से असंतुष्ट हैं और इसे अपने भविष्य के लिए खतरा मान रहे हैं। यही वजह है कि विरोध प्रदर्शन अब राज्य स्तर से बढ़कर राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच चुका है।