28 फरवरी से शुरू हुई जंग के 35 दिनों में अमेरिका को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। शुरुआती 16 दिनों में ही उसके THAAD इंटरसेप्टर का 85% और ATACMS/PrSM मिसाइलों का करीब 90% स्टॉक खत्म हो गया। ईरान के हमलों को रोकने के लिए अमेरिका और सहयोगियों ने लगभग 2,400 पैट्रियट इंटरसेप्टर इस्तेमाल किए। इसके अलावा टॉमहॉक और JASSM जैसे महंगे हथियार भी दागे गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहले 16 दिनों में ही 11,000 से ज्यादा आधुनिक हथियार खर्च हुए, जिनकी कीमत करीब 26 बिलियन डॉलर थी।
इजराइल का डिफेंस सिस्टम कमजोर
लगातार हमलों के चलते इजराइल का एयर डिफेंस सिस्टम भी कमजोर पड़ गया है। 30 दिनों के भीतर एरो-2 और एरो-3 इंटरसेप्टर का 80% से ज्यादा स्टॉक खत्म हो चुका है और अब केवल एक दिन का स्टॉक बचा है। थर्ड इंटरसेप्टर मिसाइलें भी 60% तक कम हो चुकी हैं। डेविड स्लिंग सिस्टम का आधे से ज्यादा स्टॉक खत्म हो गया है। इस बीच अमेरिका ने ईरान के 12,300 से ज्यादा ठिकानों पर हमले कर जवाबी कार्रवाई की है।
ईरान की सस्ती लेकिन असरदार रणनीति
ईरान ने इस जंग में महंगे हथियारों के बजाय सस्ती रणनीति अपनाई है। उसने अब तक 500 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें और 2,000 से अधिक ड्रोन दागे हैं। खासकर शाहेद ड्रोन, जिनकी कीमत काफी कम होती है, का इस्तेमाल कर उसने दुश्मन के महंगे इंटरसेप्टर को खत्म करने की कोशिश की। हालांकि अमेरिका का दावा है कि ईरान की सैन्य ताकत कमजोर हुई है, लेकिन ईरान का कहना है कि उसके एडवांस हथियार अभी भी सुरक्षित हैं।
जान-माल का भारी नुकसान
इस जंग में अब तक 3,000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। ईरान में 2,000 से अधिक मौतें और 26,000 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में बच्चे शामिल हैं। लेबनान में भी 1,300 से ज्यादा लोग मारे गए और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। अमेरिका के 13 सैनिकों की मौत हुई, जबकि 300 से ज्यादा घायल हुए। इसके अलावा कई हेल्थ सेंटर और सैन्य ठिकाने भी तबाह हो चुके हैं, जिससे हालात और गंभीर हो गए हैं।