डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ एक बड़ा सैन्य कदम उठा सकते हैं। खबरों के अनुसार, अमेरिका मरीन कमांडो के बाद लगभग 3000 पैराट्रूपर तैनात करने पर विचार कर रहा है। ये पैराट्रूपर बेहद तेज़ और प्रशिक्षित सैनिक होते हैं, जो दुनिया में कहीं भी करीब 18 घंटे के भीतर पहुंच सकते हैं। उनका मुख्य काम दुश्मन के इलाके में अचानक उतरकर हमला करना होता है, जिससे दुश्मन को संभलने का मौका नहीं मिलता।
ख़ार्क द्वीप क्यों है निशाने पर
ख़ार्क द्वीप ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहां से ईरान लगभग 90% कच्चे तेल का निर्यात करता है, जो उसकी आय का मुख्य स्रोत है। यही कारण है कि अमेरिका की नज़र इस द्वीप पर है। अगर यहां हमला होता है, तो ईरान को आर्थिक रूप से बड़ा झटका लग सकता है। यह द्वीप फारस की खाड़ी में स्थित है और रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है।
रणनीति: पहले कमांडो, फिर पैराट्रूपर
अमेरिकी अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर अमेरिका इस योजना पर आगे बढ़ता है तो पहले मरीन कमांडो हमला करेंगे। इसके बाद पैराट्रूपर को उतारकर जमीनी लड़ाई को आगे बढ़ाया जाएगा। इस तरह की रणनीति तेज़ और प्रभावी मानी जाती है, क्योंकि इससे दुश्मन के महत्वपूर्ण ठिकानों पर तुरंत कब्जा किया जा सकता है।
ईरान की सुरक्षा और चुनौती
ईरान ने इस द्वीप की सुरक्षा के लिए IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) के जवान तैनात किए हैं। यही वजह है कि यहां हमला करना आसान नहीं है। अमेरिका के रक्षा मुख्यालय में इस योजना पर चर्चा चल रही है, लेकिन अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। अगर यह कदम उठाया जाता है, तो क्षेत्र में तनाव और युद्ध का खतरा और बढ़ सकता है।