जोसेफ केंट ने ईरान के साथ चल रहे युद्ध के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वह राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी केंद्र के डायरेक्टर थे और इस मुद्दे पर इस्तीफा देने वाले ट्रंप प्रशासन के पहले बड़े अधिकारी बन गए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपना इस्तीफा साझा करते हुए साफ कहा कि वह इस युद्ध का समर्थन नहीं कर सकते। उनके मुताबिक, ईरान से अमेरिका को कोई तत्काल खतरा नहीं था।
ट्रंप के फैसले पर उठाए सवाल
केंट ने डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान को भी खारिज किया, जिसमें युद्ध को अमेरिकी सुरक्षा के लिए जरूरी बताया गया था। उनका कहना है कि यह जंग इजराइल और उसके प्रभावशाली लॉबी के दबाव में शुरू हुई। कुछ एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि किसी देश पर हमला तभी सही माना जाता है जब तत्काल खतरा हो। केंट के बयान के बाद इस युद्ध की वैधता पर सवाल उठने लगे हैं, हालांकि व्हाइट हाउस की ओर से इस पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
CIA और सेना का रहा अनुभव
45 वर्षीय केंट का करियर काफी मजबूत रहा है। वह अमेरिकी स्पेशल फोर्स और केंद्रीय खुफिया एजेंसी में काम कर चुके हैं। उनकी निजी जिंदगी भी चर्चा में रही है। उनकी पत्नी शैनन केंट की 2019 में सीरिया में एक आत्मघाती हमले में मौत हो गई थी। इसके बावजूद केंट ने देश की सेवा जारी रखी। उन्हें तुलसी गबार्ड का करीबी भी माना जाता है, जो इस मामले पर अब तक ज्यादा सार्वजनिक बयान नहीं दे रही हैं।
इस्तीफे में भावुक अपील
अपने इस्तीफे में केंट ने ट्रंप से फैसले पर दोबारा विचार करने की अपील की है। उन्होंने लिखा कि वह खुद एक सैनिक रह चुके हैं और कई बार युद्ध में हिस्सा ले चुके हैं, इसलिए जानते हैं कि युद्ध की कीमत क्या होती है। उन्होंने इराक युद्ध का उदाहरण देते हुए चेतावनी दी कि गलत जानकारी के आधार पर लिया गया फैसला भारी नुकसान पहुंचा सकता है। केंट ने कहा कि देश और सैनिकों की सुरक्षा सबसे जरूरी है और बिना ठोस कारण के युद्ध सही नहीं ठहराया जा सकता।