केरल विधानसभा चुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने बड़ी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। गठबंधन ने राज्य की सभी 140 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी तेज कर दी है। इस मुद्दे पर हाल ही में भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में केरल की हर सीट पर प्रस्तुति दी गई और संभावित उम्मीदवारों के नामों पर विचार हुआ। साथ ही यह भी देखा गया कि किस सीट पर किस दल के उम्मीदवार के जीतने की संभावना ज्यादा है। इसी आधार पर गठबंधन के अलग-अलग दलों के बीच सीट बंटवारे की रणनीति तैयार की जा रही है।
सहयोगी दलों के साथ सीट बंटवारे की चर्चा
केरल में भारतीय जनता पार्टी के साथ कई सहयोगी दल भी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का हिस्सा हैं। इनमें प्रमुख रूप से ट्वेंटी-20 पार्टी और भारत धर्म जन सेना शामिल हैं। इसके अलावा कुछ छोटे क्षेत्रीय दल भी गठबंधन के साथ जुड़े हुए हैं। सूत्रों के अनुसार बीजेपी करीब 100 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। वहीं ट्वेंटी-20 पार्टी को 10 से 15 सीटें मिल सकती हैं, जबकि भारत धर्म जन सेना को लगभग 25 से 30 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का मौका मिल सकता है। हालांकि अंतिम फैसला सीटों के समीकरण देखकर लिया जाएगा।
बिना सीएम चेहरे के लड़ेगा चुनाव
इस बार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन केरल में बिना किसी मुख्यमंत्री चेहरे के चुनाव मैदान में उतरने की योजना बना रहा है। पिछले चुनाव में मेट्रो मैन ई. श्रीधरन को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा। गठबंधन ने तय किया है कि चुनाव पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और उनके कामकाज के आधार पर लड़ा जाएगा। चुनाव प्रचार में विकास को मुख्य मुद्दा बनाया जाएगा और पोस्टरों में प्रधानमंत्री के साथ प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष राजीव चन्द्रशेखर समेत अन्य सहयोगी दलों के नेताओं की तस्वीरें दिखाई देंगी।
स्थानीय चुनाव से बढ़ा बीजेपी का भरोसा
हाल के स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों ने भारतीय जनता पार्टी का मनोबल बढ़ाया है। खासतौर पर तिरुवनंतपुरम में पहली बार बीजेपी का मेयर बनने के बाद पार्टी काफी उत्साहित है। पार्टी को उम्मीद है कि इस बार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन केरल में तीसरी बड़ी राजनीतिक ताकत के रूप में उभर सकता है। अगर विधानसभा त्रिशंकु होती है तो गठबंधन निर्णायक भूमिका भी निभा सकता है। साथ ही पार्टी ने क्रिश्चियन समुदाय के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने पर भी खास ध्यान दिया है।