हिंदू धर्म में नए साल की शुरुआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से मानी जाती है। इसी दिन से चैत्र नवरात्रि का भी आरंभ होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा ने संसार की रचना शुरू की थी। यही वजह है कि इस तिथि को बेहद पवित्र माना जाता है। पौराणिक कथाओं में यह भी कहा जाता है कि इसी दिन देवी दुर्गा ने अवतार लिया और ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त कर तीनों लोकों में आतंक मचाने वाले महिषासुर का वध किया था। इसलिए चैत्र प्रतिपदा को शुभ शुरुआत और नई ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
विक्रम संवत 2083 का होगा आगमन
सनातन धर्म में समय की गणना के लिए विक्रम संवत को मान्यता दी जाती है। इस बार हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 के रूप में शुरू होगा। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इस साल नववर्ष के राजा ग्रह गुरु होंगे, जबकि मंत्री और सेनापति ग्रह मंगल माने जाएंगे। ग्रहों की यह स्थिति पूरे वर्ष के प्रभाव को दर्शाती है। मान्यता है कि जब गुरु ग्रह राजा होते हैं तो ज्ञान, धर्म और सामाजिक संतुलन को बढ़ावा मिलता है। वहीं मंगल के प्रभाव से साहस और ऊर्जा का संचार भी देखने को मिलता है।
19 मार्च से शुरू होगा नया साल
द्रिक पंचांग के अनुसार इस साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 52 मिनट से शुरू होगी। वहीं यह तिथि 20 मार्च को सुबह 4 बजकर 52 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। इसलिए हिंदू नववर्ष की शुरुआत 19 मार्च, गुरुवार के दिन मानी जाएगी। चूंकि यह दिन गुरुवार है, इसलिए ज्योतिष के अनुसार इस साल के राजा गुरु ग्रह होंगे। इस वर्ष को ‘रौद्र संवत्सर’ भी कहा जाएगा। हिंदू धर्म में इस दिन को नई शुरुआत, पूजा-पाठ और शुभ कार्यों के लिए बेहद अच्छा माना जाता है।
ऐसे करें नववर्ष पर गणेश पूजा
हिंदू नववर्ष के पहले दिन भगवान गणेश की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है। गणेश जी को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता कहा जाता है। मान्यता है कि उनकी पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की वृद्धि होती है। पूजा के लिए सुबह स्नान कर साफ कपड़े पहनें और एक चौकी पर गणेश जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। भगवान को दीप, धूप, कपूर, फूल, रोली और लाल चंदन अर्पित करें। बप्पा को मोदक का भोग लगाएं और ताजी दूर्वा जरूर चढ़ाएं। अंत में गणेश मंत्रों का जाप और आरती करके पूजा पूरी करें।