हल्दी वाला दूध लंबे समय से भारतीय घरों का एक पारंपरिक और लोकप्रिय हेल्थ ड्रिंक रहा है। सर्दियों में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, कई लोगों को रात में सोने से पहले यह पीने की सलाह दी जाती है। दूध में हल्दी के साथ काली मिर्च, अदरक और दालचीनी मिलाकर बनाया गया यह पेय स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। आयुर्वेद में भी हल्दी दूध को शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और कई छोटी-मोटी बीमारियों से बचाने में मददगार बताया गया है।
इम्यूनिटी और दर्द में देता है राहत
हल्दी दूध में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीमाइक्रोबियल गुण शरीर की इम्यूनिटी मजबूत करने में मदद करते हैं। सर्दियों में यह सर्दी-खांसी और फ्लू से बचाव में सहायक माना जाता है। खासकर बुजुर्गों के लिए यह जोड़ों के दर्द, गठिया और मांसपेशियों के दर्द में राहत देने में मदद कर सकता है। इसके अलावा यह गले की खराश को कम करने और शरीर को आराम देने में भी उपयोगी माना जाता है। कई लोग इसे पीने के बाद बेहतर नींद आने का अनुभव भी बताते हैं।
हल्दी दूध पीने का सही समय क्या है
अक्सर लोग हल्दी दूध पीते समय एक आम गलती कर बैठते हैं, वह इसे सोने से ठीक पहले पी लेते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार रात के खाने और सोने के बीच कम से कम एक से दो घंटे का अंतर होना चाहिए। हल्दी दूध कैलोरी से भरपूर होता है और इसे तुरंत पीकर सो जाने से पाचन पर असर पड़ सकता है। डाइटीशियन चारू सदाना के मुताबिक हल्दी में मौजूद करक्यूमिन पाचन में मदद करता है, लेकिन अगर इसे भारी भोजन के तुरंत बाद या सोने से ठीक पहले लिया जाए तो कुछ लोगों में एसिडिटी या एसिड रिफ्लक्स की समस्या भी हो सकती है।
इन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए
हल्दी दूध सेहत के लिए फायदेमंद जरूर है, लेकिन कुछ लोगों को इसका सेवन करते समय खास सावधानी रखनी चाहिए। जिन लोगों को गॉलब्लैडर से जुड़ी समस्या है, उन्हें हल्दी दूध से बचना चाहिए क्योंकि यह पित्त के स्राव को बढ़ा सकता है। जो लोग ब्लड थिनर दवाइयां लेते हैं, उन्हें भी हल्दी सीमित मात्रा में ही लेनी चाहिए क्योंकि इससे ब्लीडिंग का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा जिन लोगों में आयरन की कमी है, उन्हें भी हल्दी का ज्यादा सेवन नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं, लिवर की बीमारी से पीड़ित लोगों या सर्जरी की तैयारी कर रहे मरीजों को इसे नियमित रूप से लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।