खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सप्लाई को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच भारत सरकार ने स्थिति को लेकर भरोसा जताया है. सरकारी सूत्रों के अनुसार देश के पास फिलहाल कच्चे तेल और ईंधन का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. बताया गया है कि भारतीय रिफाइनरियों में कच्चे तेल का अच्छा भंडार है और सरकार पूरी स्थिति पर लगातार नजर रख रही है. अगर किसी वजह से सप्लाई प्रभावित होती है तो भी देश में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाने की तैयारी की जा चुकी है.
जरूरत पड़ने पर दूसरे देशों से बढ़ेगी सप्लाई
सरकार का कहना है कि अगर खाड़ी क्षेत्र से तेल की सप्लाई में कोई बाधा आती है तो भारत दूसरे क्षेत्रों से आयात बढ़ाने के लिए तैयार है. यानी तेल की कमी को पूरा करने के लिए वैकल्पिक स्रोतों का इस्तेमाल किया जाएगा. सरकार पहले से ही ऐसे विकल्पों पर काम कर रही है, जिससे देश में ईंधन की सप्लाई प्रभावित न हो. जरूरत पड़ने पर आयात के नए रास्ते अपनाए जाएंगे, ताकि बाजार में तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता बनी रहे.
रूस से बढ़ा भारत का तेल आयात
पिछले कुछ वर्षों में रूस से भारत का कच्चे तेल का आयात काफी बढ़ा है. जानकारी के अनुसार भारतीय रिफाइनरियां सिर्फ वही रूसी तेल खरीद रही हैं जिस पर कोई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध नहीं है. सूत्रों के मुताबिक साल 2022 में भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी सिर्फ 0.2 प्रतिशत थी. वहीं अब यह हिस्सा काफी बढ़ गया है. फरवरी महीने में भारत के कुल कच्चे तेल आयात का करीब 20 प्रतिशत रूस से आया और इस दौरान रोजाना लगभग 10.4 लाख बैरल तेल आयात किया गया.
LPG सप्लाई मजबूत करने की तैयारी
सरकार ने एलपीजी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए भी कई कदम उठाए हैं. सभी एलपीजी रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि घरेलू मांग आसानी से पूरी हो सके. इसके साथ ही सरकार ने मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड यानी मैंगलोर रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) के बंद होने की खबरों को गलत बताया है. रिफाइनरी सामान्य रूप से काम कर रही है और वहां पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. इसके अलावा भारत एलपीजी आयात के स्रोत भी बढ़ा रहा है और हाल ही में अमेरिका से एलपीजी की पहली खेप भी देश में पहुंची है.