बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। खबर है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 5 मार्च को राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल कर सकते हैं। उनके नामांकन के दौरान गृह मंत्री अमित शाह के मौजूद रहने की भी चर्चा है। अगर नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं, तो यह उनके राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका का संकेत माना जाएगा। हालांकि सूत्रों के मुताबिक, वे कुछ महीनों तक मुख्यमंत्री पद पर भी बने रह सकते हैं। संवैधानिक प्रावधानों के तहत वे छह महीने तक दोनों जिम्मेदारियां संभाल सकते हैं।
निशांत की एंट्री से बढ़ी चर्चा
इसी बीच उनके बेटे निशांत कुमार के जेडीयू में शामिल होने की खबर ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। पहले चर्चा थी कि निशांत का राजनीतिक करियर राज्यसभा से शुरू होगा, लेकिन अब संकेत मिल रहे हैं कि वे सीधे बिहार की राजनीति में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। अटकलें हैं कि उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो सत्ता संतुलन बदल सकता है और बीजेपी के मुख्यमंत्री बनने की संभावना भी खुल सकती है।
जेडीयू और एनडीए की अहम बैठक
बिहार में पांच राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होना है, जिनमें से दो सीटें जेडीयू के खाते में हैं। इस मुद्दे पर चर्चा के लिए जेडीयू ने बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि इसी बैठक में राज्यसभा उम्मीदवारों के नाम तय होंगे। साथ ही एनडीए विधायकों की भी बैठक पटना में अगले 24 से 48 घंटों में हो सकती है। इन बैठकों में सत्ता परिवर्तन और नेतृत्व को लेकर रणनीति पर चर्चा संभव है। राजनीतिक गलियारों में इसे बड़ा संकेत माना जा रहा है।
बीजेपी की भूमिका और आगे का समीकरण
राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी पहले ही दो उम्मीदवारों के नाम घोषित कर चुकी है। एनडीए के सहयोगी दलों के नाम भी सामने आ चुके हैं। जेडीयू कोटे से जिन दो नामों की घोषणा होनी है, उनमें से एक सीट पर खुद नीतीश कुमार के नाम की चर्चा है। 2005 से मुख्यमंत्री रहे नीतीश ने 2025 चुनाव में भी जीत दर्ज की थी। उनकी पार्टी को 85 और बीजेपी को 89 सीटें मिली थीं। अगर वे दिल्ली की राजनीति में जाते हैं, तो बिहार में नए चेहरे की एंट्री तय मानी जा रही है। आने वाले महीनों में राज्य की सियासत में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।