मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखा। प्रमुख सूचकांक लगातार तीसरे दिन गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 1,000 से ज्यादा अंक टूटकर 80,238 के आसपास बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 भी तेज गिरावट के साथ बंद हुआ। गिरावट इतनी बड़ी रही कि करीब 850 कंपनियों के शेयर 52 हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गए। निवेशकों में अनिश्चितता और वैश्विक तनाव का डर बाजार पर भारी पड़ा।
मार्केट कैप घटा, कई बड़े स्टॉक्स टूटे
गिरावट का असर कुल बाजार पूंजीकरण पर भी दिखा। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप कई लाख करोड़ रुपये घट गया। कई दिग्गज कंपनियों के शेयर भी दबाव में रहे। इनमें TCS, ITC, विप्रो और IRCTC जैसे बड़े नाम शामिल रहे। हालांकि कुछ स्टॉक्स जैसे ONGC और SAIL जैसे शेयरों में मजबूती भी देखने को मिली, लेकिन कुल मिलाकर बाजार का रुख कमजोर ही रहा।
ग्लोबल तनाव और तेल कीमतों का असर
विशेषज्ञों के मुताबिक बाजार की गिरावट के पीछे वैश्विक तनाव बड़ी वजह है। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च हेड विनोद नायर का कहना है कि ईरान से जुड़ी घटनाओं के बाद वैश्विक बाजार अस्थिर हो गए हैं। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और रुपये की कमजोरी ने भी चिंता बढ़ाई है। इससे महंगाई बढ़ने और ऊर्जा व केमिकल सेक्टर के मुनाफे पर दबाव पड़ने की आशंका है।
आगे क्या रहेगा बाजार का रुख
कोटक सिक्योरिटीज के इक्विटी रिसर्च हेड श्रीकांत चौहान के मुताबिक बाजार फिलहाल कमजोर है, लेकिन ओवरसोल्ड स्थिति में है। यानी मौजूदा स्तर से तकनीकी उछाल संभव है। उनके अनुसार 24,750 का स्तर अहम सपोर्ट है। अगर बाजार इसके ऊपर टिकता है तो रिकवरी हो सकती है, लेकिन नीचे जाने पर और गिरावट की आशंका बनी रहेगी। निवेशकों को फिलहाल सावधानी के साथ रणनीति बनानी चाहिए।