इजराइल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य हमलों ने पूरे मिडिल ईस्ट को गंभीर संकट की स्थिति में ला दिया है। दोनों तरफ से लगातार जवाबी कार्रवाई हो रही है, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता तेजी से बढ़ रही है। ईरान न सिर्फ इजराइल, बल्कि मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बना रहा है। हालात इतने संवेदनशील हो चुके हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ती जा रही है और कई देश स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
भारत ने जताई गहरी चिंता
इन घटनाओं पर भारत ने भी गंभीर चिंता व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय भारत ने बयान जारी कर कहा कि ईरान और खाड़ी क्षेत्र में हाल के घटनाक्रम बेहद चिंताजनक हैं। भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव को और बढ़ने से रोकने और आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की है। साथ ही भारत ने यह भी कहा कि विवादों का समाधान सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति के जरिए होना चाहिए। सरकार का मानना है कि संवाद ही इस संकट को कम करने का सबसे प्रभावी रास्ता है।
नागरिकों को दी गई सलाह
भारत ने साफ कहा है कि सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना जरूरी है। मौजूदा हालात को देखते हुए भारतीय मिशन क्षेत्र में मौजूद नागरिकों के लगातार संपर्क में हैं। सरकार ने वहां रहने वाले भारतीयों से सतर्क रहने, स्थानीय सुरक्षा दिशा-निर्देशों का पालन करने और दूतावास के संपर्क में बने रहने की सलाह दी है। जरूरत पड़ने पर सहायता उपलब्ध कराने के लिए विशेष निगरानी व्यवस्था भी की गई है। भारत का फोकस अपने नागरिकों की सुरक्षा और स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए रखने पर है।
आरोप-प्रत्यारोप और सख्त बयानबाजी
तनाव के बीच सख्त राजनीतिक बयान भी सामने आ रहे हैं। बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ईरान पर किए गए हमले वहां के लोगों को अपना भविष्य तय करने का मौका देंगे। उन्होंने ईरान की सत्ता पर आरोप लगाते हुए कहा कि उसने दशकों से क्षेत्र में भय और अस्थिरता फैलाने का काम किया है। उन्होंने परमाणु हथियार और मिसाइल कार्यक्रमों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि इजराइल की सुरक्षा के लिए कार्रवाई जरूरी है। लगातार हमलों और तीखी बयानबाजी ने पूरे क्षेत्र में अनिश्चितता और युद्ध की आशंका को और बढ़ा दिया है।