वैश्विक जियो-पॉलिटिकल तनाव और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेज बदलावों के बावजूद भारतीय टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री मजबूती से आगे बढ़ रही है। उद्योग संगठन नैसकॉम के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में सेक्टर का कुल रेवेन्यू 6.1 प्रतिशत बढ़कर 315 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। यह संकेत देता है कि बदलते टेक माहौल और अनिश्चित वैश्विक हालात के बावजूद भारतीय आईटी सेक्टर की ग्रोथ जारी है। संगठन का कहना है कि इंडस्ट्री ने न सिर्फ कमाई बढ़ाई है बल्कि रोजगार के अवसर भी बनाए रखे हैं।
रोजगार बढ़ा, ग्रोथ का तालमेल कम
नैसकॉम के अध्यक्ष राजेश नांबियार के अनुसार रोजगार और रेवेन्यू ग्रोथ के बीच तालमेल नहीं दिख रहा। जहां राजस्व 6.1 प्रतिशत बढ़ रहा है, वहीं रोजगार वृद्धि सिर्फ 2.3 प्रतिशत है। फिर भी सेक्टर रोजगार सृजन करता रहा है, जो सकारात्मक संकेत है। वित्त वर्ष 2025-26 में कुल प्रत्यक्ष कर्मचारियों की संख्या 59.5 लाख तक पहुंचने का अनुमान है। इनमें से 20 लाख से अधिक कर्मचारियों को एआई की जानकारी दी जा चुकी है और करीब तीन लाख को एडवांस एआई स्किल्स में ट्रेनिंग दी गई है। एआई से जुड़ा कुल रेवेन्यू 10 से 12 अरब डॉलर के बीच रहने का अनुमान है।
टेक्नोलॉजी पर खर्च और नए ग्रोथ सेक्टर
टेक्नोलॉजी पर खर्च लगातार बढ़ रहा है, लेकिन अब निवेश पारंपरिक क्षेत्रों से हटकर नए टेक डोमेन में हो रहा है। आईटी सेवाओं का रेवेन्यू 149 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जो पिछले साल 143 अरब डॉलर था। बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट 55 अरब डॉलर से बढ़कर 59 अरब डॉलर और सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट्स 21 अरब डॉलर से बढ़कर 23 अरब डॉलर तक पहुंच सकते हैं। यानी टेक इंडस्ट्री सिर्फ आकार में ही नहीं बल्कि सेवाओं की विविधता में भी तेजी से विस्तार कर रही है।
नए बाजारों और सेक्टरों से तेजी
इंजीनियरिंग, अनुसंधान और विकास का रेवेन्यू 63 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि हार्डवेयर कंपनियों की कमाई भी बढ़कर 21 अरब डॉलर हो सकती है। पहले जहां ग्रोथ का बड़ा हिस्सा उत्तरी अमेरिका से आता था, अब एशिया-प्रशांत और पश्चिम एशिया में तेजी देखी जा रही है। घरेलू बाजार भी मजबूत बना हुआ है और यहां राजस्व 7.9 प्रतिशत की दर से बढ़ सकता है। खासकर हेल्थकेयर, ट्रैवल और ट्रांसपोर्ट सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जिसमें भारत में बन रहे ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।