Haryana में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक 590 करोड़ घोटाले पर घमासान, सरकार ने बनाई हाई लेवल जांच कमेटी

हरियाणा में 590 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता के मामले ने सियासी और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। इस पूरे विवाद के बाद हरियाणा सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मामले की गहन जांच के लिए चार सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है। यह मामला IDFC First Bank से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें सरकारी धन के गबन को लेकर गंभीर सवाल उठे। विपक्ष ने सरकार की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए, जिसके बाद प्रशासन ने जांच को प्राथमिकता देते हुए एक महीने में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

कौन-कौन अधिकारी जांच में शामिल

सरकार की ओर से गठित इस जांच समिति में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। कमेटी में वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अरुण कुमार गुप्ता, विकास एवं पंचायत निदेशक अनीश यादव, पंचकूला नगर निगम आयुक्त विनय कुमार और हरियाणा लोक सेवा आयोग के उप सचिव सतीश कुमार शामिल हैं। समिति राज्य की बैंकिंग प्रक्रियाओं, नियमों और उनके अनुपालन की पूरी समीक्षा करेगी, ताकि गड़बड़ी की असली वजह सामने आ सके।

सरकार का दावा: रकम का बड़ा हिस्सा वापस

मामले को लेकर विधानसभा में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सरकार ने तेजी से कार्रवाई करते हुए बड़ी रकम रिकवर कर ली है। उनके अनुसार 590 करोड़ रुपये में से 556 करोड़ रुपये 24 घंटे के भीतर ही राज्य सरकार के अन्य बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए गए। सरकार का दावा है कि त्वरित हस्तक्षेप से सार्वजनिक धन को सुरक्षित किया गया और वित्तीय नुकसान को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया गया है।

हर एंगल से होगी गहन जांच

उच्च स्तरीय समिति अब पूरे मामले की गहराई से जांच करेगी। यह देखा जाएगा कि बैंक स्तर पर क्या चूक हुई और क्या किसी सरकारी विभाग के अधिकारी या कर्मचारी भी इस कथित गबन में शामिल थे। समिति बैंकिंग नीतियों, वित्तीय नियंत्रण व्यवस्था और निगरानी तंत्र की भी समीक्षा करेगी। सरकार का कहना है कि दोषियों की पहचान होने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए नीतिगत सुधार भी सुझाए जाएंगे।

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Author: The Hindi Post