IDFC First Bank के शेयरों में आज करीब 17 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। जो शेयर पहले 83.51 रुपये पर ट्रेड कर रहे थे, वे गिरकर करीब 70 रुपये तक पहुंच गए। इस तेज गिरावट की वजह 590 करोड़ रुपये का संदिग्ध घोटाला सामने आना है। मामले के खुलासे के बाद बैंक मैनेजमेंट तुरंत सक्रिय हो गया।
सीईओ ने संभाला मोर्चा
बैंक के सीईओ वी. वैद्यनाथन ने खुद स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने बताया कि धोखाधड़ी केवल एक ब्रांच तक सीमित लग रही है। मामले की गहराई से जांच के लिए अंतरराष्ट्रीय ऑडिट फर्म KPMG को स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिट की जिम्मेदारी दी गई है।
सरकार और RBI की नजर
मामले की गंभीरता को देखते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। फिलहाल बैंकिंग सिस्टम पर कोई बड़ा खतरा नहीं है और बैंक के पास पर्याप्त पूंजी मौजूद है।
कैसे सामने आया घोटाला
यह फर्जीवाड़ा तब सामने आया जब हरियाणा सरकार के एक विभाग ने खाते बंद कर फंड ट्रांसफर करने का अनुरोध किया। प्रक्रिया के दौरान बैलेंस में बड़ी गड़बड़ी दिखी। जांच में पता चला कि बैंक कर्मचारियों और बाहरी लोगों की मिलीभगत से सरकारी खातों में धोखाधड़ी हुई थी।
सख्त कार्रवाई और जांच
घोटाले के खुलासे के बाद हरियाणा सरकार ने बैंक को सरकारी कामकाज से ब्लैकलिस्ट कर दिया। बैंक ने चार अधिकारियों को निलंबित किया, पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और संदिग्ध खातों पर रोक लगाने की प्रक्रिया शुरू की। सभी रेगुलेटर्स को भी जानकारी दे दी गई है।
बैंक पर वित्तीय असर
ब्रोकरेज फर्म Nomura के अनुसार 590 करोड़ रुपये की रकम बैंक के लिए बड़ी है। यह राशि अनुमानित वार्षिक मुनाफे का करीब 28 प्रतिशत है। बैंक के पूंजी अनुपात पर भी असर पड़ सकता है। अंतिम नुकसान इस पर निर्भर करेगा कि कितनी रकम वापस मिलती है।
AU बैंक भी प्रभावित
सरकारी कार्रवाई की आंच AU Small Finance Bank तक पहुंच गई। इसे भी सरकारी बिजनेस से बाहर कर दिया गया। खबर आते ही शेयर बाजार में बैंक के शेयर गिर गए और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर तेज गिरावट दर्ज हुई। हालांकि बैंक ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है।
ग्राहकों और बाजार की चिंता
दोनों बैंकों ने ग्राहकों को भरोसा दिलाया है कि उनके खाते सुरक्षित हैं। लेकिन जब तक फोरेंसिक ऑडिट की रिपोर्ट नहीं आती, बाजार में दबाव बना रह सकता है। इस घटना ने बैंकिंग गवर्नेंस और आंतरिक नियंत्रण प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।