होली से आठ दिन पहले शुरू होने वाली अवधि को होलाष्टक कहा जाता है। यह आठ दिनों का समय धार्मिक दृष्टि से खास माना जाता है। मान्यता है कि इस अवधि में भक्त प्रह्लाद को कष्ट दिए गए थे, इसलिए इसे कठिन और अशुभ समय माना जाता है। हर साल यह फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से शुरू होता है और होलिका दहन के दिन समाप्त होता है। इस साल होलाष्टक 24 फरवरी से शुरू होकर 3 मार्च तक रहेगा।
क्यों माने जाते हैं ये दिन अशुभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक के दौरान ग्रहों की स्थिति उग्र मानी जाती है और नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। इसी वजह से इस समय विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते। ऐसा माना जाता है कि इस अवधि में किए गए मांगलिक कार्यों का शुभ फल नहीं मिलता। इसलिए लोग इस दौरान बड़े फैसले और नए काम शुरू करने से बचते हैं।
होलाष्टक में क्या करना चाहिए
हालांकि यह समय शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है, लेकिन पूजा-पाठ और आध्यात्मिक साधना के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। इन दिनों दान, जप, तप और भगवान की पूजा करने की सलाह दी जाती है। पितरों का तर्पण करना और ग्रह शांति के उपाय भी किए जाते हैं। अगर संभव हो तो मथुरा और वृंदावन की परिक्रमा करना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के पाठ और मन की शुद्धि पर विशेष ध्यान देने की परंपरा है।
होलाष्टक में क्या नहीं करना चाहिए
इन आठ दिनों में शादी-विवाह या कोई भी मांगलिक संस्कार नहीं करना चाहिए। भूमि, मकान या वाहन की खरीदारी भी टालने की सलाह दी जाती है। नवविवाहित महिलाओं को इस अवधि में ससुराल में रहने से भी बचने की परंपरा बताई गई है। कुल मिलाकर यह समय नए काम शुरू करने के बजाय आत्मचिंतन, पूजा और संयम का माना जाता है।