Smoking से सुकून नहीं बढ़ता है तनाव, एक्सपर्ट बोले- निकोटिन देता है बस कुछ मिनटों का झूठा आराम, जानें सच

स्मोकिंग करने वाले कई लोग मानते हैं कि इससे उनका मन शांत होता है और तनाव कम हो जाता है। खासकर जब काम का दबाव ज्यादा हो तो लोग ज्यादा सिगरेट पीते हैं। ऐसा इसलिए महसूस होता है क्योंकि सिगरेट में मौजूद निकोटिन बहुत तेजी से दिमाग तक पहुंच जाता है। यह शरीर में फील-गुड हार्मोन को सक्रिय करता है, जिससे थोड़ी देर के लिए अच्छा महसूस होता है। यही कारण है कि लोगों को लगता है कि स्मोकिंग से तनाव दूर हो गया, जबकि असल में यह असर बहुत ही अस्थायी होता है।

सच क्या है, एक्सपर्ट की राय

दिल्ली के लंग्स वेलनेस सेंटर की विशेषज्ञ डॉ. नेहा वाधेरा बताती हैं कि निकोटिन कुछ मिनटों के लिए मूड बेहतर कर सकता है, लेकिन इससे तनाव खत्म नहीं होता। जब शरीर में निकोटिन का असर कम होने लगता है तो बेचैनी, चिड़चिड़ापन और तनाव फिर बढ़ने लगता है। यानी स्मोकिंग राहत नहीं देती, बल्कि तनाव का एक चक्र बना देती है जिसमें व्यक्ति बार-बार सिगरेट की जरूरत महसूस करता है।

लंबे समय में बढ़ता है शारीरिक और मानसिक खतरा

लगातार स्मोकिंग करने से सिर्फ मानसिक नहीं, शारीरिक समस्याएं भी बढ़ती हैं। लंबे समय तक धूम्रपान करने वालों को सांस लेने में दिक्कत, लगातार खांसी और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। कई रिसर्च में फेफड़ों की सूजन, COPD और दिल से जुड़ी बीमारियों के साथ धूम्रपान का सीधा संबंध पाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय के साथ स्मोकिंग मानसिक तनाव कम नहीं करती, बल्कि चिंता और बेचैनी को और बढ़ा सकती है।

स्मोकिंग छोड़ना मुश्किल नहीं, सही तरीका जरूरी

अगर कोई व्यक्ति स्मोकिंग छोड़ना चाहता है तो इसके लिए कई प्रभावी तरीके मौजूद हैं। डॉक्टर की सलाह से दवाएं, काउंसलिंग और थेरेपी की मदद ली जा सकती है। हर व्यक्ति की स्थिति अलग होती है, इसलिए इलाज भी उसी हिसाब से तय किया जाता है। शुरुआत में थोड़ी परेशानी या बेचैनी महसूस हो सकती है, लेकिन सही इलाज और धैर्य से इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, स्मोकिंग छोड़ना ही तनाव और सेहत दोनों के लिए सबसे अच्छा फैसला है।

The Hindi Post
Author: The Hindi Post