नई दिल्ली में आयोजित बैठकों के दौरान शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और नरेंद्र मोदी की मुलाकात ने भारत-यूएई संबंधों को नई दिशा देने का संकेत दिया। नई दिल्ली में हुई इस मुलाकात में टेक्नोलॉजी, निवेश और रणनीतिक साझेदारी को तेज करने पर जोर रहा। अबू धाबी से आए क्राउन प्रिंस का यह दौरा दिखाता है कि अब दोनों देशों के रिश्तों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अहम भूमिका निभाने जा रहा है।
रणनीतिक साझेदारी की नई गति
बैठक में भारत और संयुक्त अरब अमीरात की व्यापक रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा की गई। व्यापार, ऊर्जा, निवेश और लोगों के बीच मजबूत संबंधों को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। खास तौर पर CEPA के बाद व्यापार में तेजी पर संतोष जताया गया। दोनों पक्षों ने अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और नवाचार जैसे हाई-टेक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई।
AI और सुपरकंप्यूटर में संयुक्त कदम
तकनीकी सहयोग के तहत सी‑डैक, G42 और मोहम्मद बिन जायद यूनिवर्सिटी ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ भारत में सुपरकंप्यूटर क्लस्टर तैनात करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। यह सिस्टम रिसर्च और इंडस्ट्री एप्लिकेशन के लिए बड़ा प्लेटफॉर्म बनेगा। साथ ही स्वास्थ्य और मेडिकल रिसर्च में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन भी अंतिम रूप में पहुंचा, जिससे डिजिटल हेल्थ और फार्मा सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा।
निवेश और भविष्य की मेजबानी योजना
वित्तीय सहयोग के तहत गुजरात के GIFT सिटी में अबू धाबी नेशनल इंश्योरेंस कंपनी का दफ्तर खोलने की पहल का स्वागत किया गया। इससे निवेश प्रवाह और वित्तीय कनेक्ट मजबूत होने की उम्मीद है। भारत ने भविष्य में स्विट्जरलैंड और फिर यूएई द्वारा AI समिट की मेजबानी के प्रस्ताव का भी समर्थन किया। कुल मिलाकर, यह दौरा टेक्नोलॉजी-ड्रिवन साझेदारी को नई ऊंचाई देने वाला कदम माना जा रहा है।