भारत में लोगों को कई तरह के टैक्स देने होते हैं, जिनमें डायरेक्ट और इनडायरेक्ट दोनों शामिल हैं. इन्हीं में से एक है प्रोफेशनल टैक्स. यह एक डायरेक्ट टैक्स है, जिसे राज्य सरकारें नौकरी, व्यापार या किसी प्रोफेशन से कमाई करने वाले लोगों पर लगाती हैं. आम तौर पर नौकरी करने वालों की सैलरी से यह टैक्स उनका नियोक्ता काटकर सरकार को जमा करता है. वहीं, जो लोग खुद का काम करते हैं, उन्हें यह टैक्स सीधे राज्य सरकार को देना होता है. इसकी अधिकतम सीमा सालाना 2,500 रुपये तक होती है.
हर राज्य में लागू नहीं होता टैक्स
प्रोफेशनल टैक्स पूरे देश में लागू नहीं है, क्योंकि यह राज्य स्तर का टैक्स है. कुछ राज्य इसे लागू करते हैं, जैसे महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और गुजरात. वहीं कई राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ऐसे भी हैं जहां यह टैक्स नहीं लिया जाता, जैसे दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान. इसलिए यह जानना जरूरी है कि आप जिस राज्य में काम करते हैं, वहां यह टैक्स लागू है या नहीं.
किन लोगों को देना होता है प्रोफेशनल टैक्स
जो भी व्यक्ति किसी प्रोफेशन या नौकरी से कमाई करता है, उसे उस राज्य में प्रोफेशनल टैक्स देना पड़ सकता है जहां यह लागू है. इसमें सरकारी और प्राइवेट नौकरी करने वाले कर्मचारी शामिल हैं. इसके अलावा डॉक्टर, वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट, आर्किटेक्ट या कंसल्टेंट जैसे प्रोफेशनल भी इसके दायरे में आते हैं. कई राज्यों में बिजनेस ओनर्स और सेल्फ-एम्प्लॉयड लोग भी इसके अंतर्गत आते हैं. हालांकि एक तय आय से कम कमाने वालों को कुछ राज्यों में छूट भी मिलती है, जिसकी सीमा अलग-अलग हो सकती है.
इनकम टैक्स से कैसे अलग है यह टैक्स
प्रोफेशनल टैक्स और इनकम टैक्स दोनों डायरेक्ट टैक्स हैं, लेकिन इनमें बड़ा अंतर है. इनकम टैक्स केंद्र सरकार लगाती है और यह आपकी कुल आय पर आधारित होता है, जबकि प्रोफेशनल टैक्स राज्य सरकारें लगाती हैं और इसकी एक तय अधिकतम सीमा होती है. नौकरीपेशा लोगों के लिए यह CTC का हिस्सा नहीं बल्कि टेक-होम सैलरी से कटने वाली राशि होती है. ClearTax के अनुसार यह हर महीने ग्रॉस सैलरी के आधार पर कैलकुलेट किया जाता है. यानी यह छोटा दिखने वाला टैक्स भी आपकी फाइनेंशियल प्लानिंग में अहम भूमिका निभाता है.