भारत और फ्रांस के बीच 3.25 लाख करोड़ रुपये की ऐतिहासिक रक्षा डील होने जा रही है. इस समझौते के तहत भारत 114 राफेल फाइटर जेट खरीदेगा. यह भारत की अब तक की सबसे बड़ी डिफेंस डील मानी जा रही है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने इस सौदे को मंजूरी दी है. डील के तहत 18 जेट सीधे फ्रांस से खरीदे जाएंगे, जबकि बाकी 96 जेट भारत में बनाए जाएंगे. यानी लगभग 80 प्रतिशत निर्माण देश के भीतर ही होगा, जिससे स्वदेशी रक्षा उत्पादन को भी मजबूती मिलेगी.
2032 तक भारत की राफेल ताकत
इस डील के बाद भारत की वायु शक्ति में जबरदस्त उछाल आएगा. फिलहाल भारत के पास 36 राफेल जेट हैं, जो अंबाला एयर फोर्स स्टेशन और हासिमारा एयर फोर्स स्टेशन पर तैनात हैं. इसके अलावा अप्रैल 2025 में भारतीय नौसेना ने 26 मरीन राफेल का भी सौदा किया, जिनकी डिलीवरी 2028 से शुरू होगी. नई डील पूरी होने के बाद 2032 तक भारत के पास कुल 176 राफेल जेट होंगे. खास बात यह होगी कि भारत फ्रांस के बाहर पहला देश बनेगा, जो एयरफोर्स और नेवी दोनों वर्जन के राफेल ऑपरेट करेगा.
फ्रांस के बेड़े से सीधी तुलना
इस समय फ्रांस के पास कुल 178 राफेल जेट हैं, जिनमें एयरफोर्स और नेवी दोनों शामिल हैं. अनुमान है कि 2032 तक भारत के पास 176 जेट होंगे, यानी संख्या में फ्रांस के बेहद करीब. हालांकि फ्रांस 2035 के बाद अपने बेड़े को बढ़ाकर 225 तक करने की योजना बना रहा है. इसके अलावा अक्टूबर 2025 में फ्रांस ने और जेट खरीदने की योजना भी बताई थी. लेकिन फिलहाल स्थिति यह है कि आने वाले वर्षों में भारत की राफेल ताकत फ्रांस के लगभग बराबर पहुंच सकती है, जो वैश्विक सैन्य संतुलन के लिहाज से बड़ी बात मानी जा रही है.
फ्रांस का सबसे बड़ा ग्राहक बना भारत
इस डील के बाद भारत फ्रांस का सबसे बड़ा राफेल ग्राहक बन जाएगा. राफेल बनाने वाली डसॉल्ट एविएशन को अब तक कई देशों से ऑर्डर मिल चुके हैं. इनमें मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया, ग्रीस और क्रोएशिया शामिल हैं. लेकिन 176 जेट का ऑर्डर भारत को सबसे बड़ा खरीदार बनाता है. इससे भारत-फ्रांस रक्षा साझेदारी और मजबूत होगी और भारत की सैन्य क्षमता नई ऊंचाई पर पहुंच जाएगी.