आजकल ज्यादातर लोग सोने से पहले मोबाइल देखते-देखते ही सो जाते हैं या फोन को सिर के पास रख लेते हैं। लेकिन लॉस एंजेलिस के एनेस्थीसियोलॉजिस्ट डॉ. मायरो फिगुरा के मुताबिक यह आदत सेहत के लिए ठीक नहीं मानी जाती। उनका कहना है कि फोन इस्तेमाल न होने पर भी रेडिएशन छोड़ सकता है। इससे नींद की गुणवत्ता खराब हो सकती है, सिरदर्द हो सकता है और लंबे समय में स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। इसलिए वे सलाह देते हैं कि सोते समय फोन को सिर से दूर रखें, खासकर तकिए के पास नहीं।
मोबाइल रेडिएशन और कैंसर का सच
मोबाइल से निकलने वाला विकिरण “नॉन-आयोनाइजिंग रेडिएशन” होता है, जो सीधे डीएनए को नुकसान नहीं पहुंचाता। यही वजह है कि इसे खतरनाक आयोनाइजिंग रेडिएशन जैसा नहीं माना जाता। फिर भी विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे “संभावित रूप से कार्सिनोजेनिक” श्रेणी में रखा है। यानी इससे कैंसर होने की संभावना पूरी तरह साबित नहीं है, लेकिन पूरी तरह नकारा भी नहीं गया। इसी श्रेणी में कॉफी और अचार जैसी सामान्य चीजें भी आती हैं, इसलिए इसे सीधे बड़ा खतरा कहना सही नहीं होगा।
दूसरे एक्सपर्ट क्या कहते हैं?
कोलकाता के अपोलो कैंसर सेंटर की रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. अरुंधति डे का कहना है कि अब तक कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है कि मोबाइल फोन की रेडियोफ्रीक्वेंसी तरंगें ब्रेन ट्यूमर या कैंसर का कारण बनती हैं। दुनिया भर में लंबे समय तक मोबाइल इस्तेमाल पर कई बड़े अध्ययन हुए हैं, लेकिन अभी तक यह साबित नहीं हुआ कि सिर्फ सिर के पास फोन रखकर सोने से कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है।
सबसे बड़ा असर: आपकी नींद पर
विशेषज्ञों के मुताबिक असली समस्या रेडिएशन से ज्यादा नींद की गुणवत्ता है। स्मार्टफोन लगातार रोशनी, नोटिफिकेशन, वाइब्रेशन और स्क्रीन की चमक छोड़ते रहते हैं। भले ही आप सो रहे हों, दिमाग इन संकेतों को महसूस करता रहता है। इससे नींद गहरी नहीं आती और शरीर ठीक से आराम नहीं कर पाता। साथ ही चार्जिंग के दौरान फोन गर्म होने या आग लगने का जोखिम भी रहता है। इसलिए बेहतर यही है कि फोन को बिस्तर से दूर रखें, इससे नींद भी बेहतर होगी और संभावित जोखिम भी कम होंगे।