उत्तर प्रदेश के बजट सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने माघ मेले में हुई घटना का जिक्र करते हुए विपक्ष की नैतिकता पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है, ऐसे में किसी भी तरह की अव्यवस्था या नियम तोड़ने की कोशिश गंभीर परिणाम ला सकती है। उन्होंने कहा कि धार्मिक और सार्वजनिक आयोजनों में अनुशासन जरूरी है, क्योंकि छोटी सी चूक भी बड़ी दुर्घटना को जन्म दे सकती है।
शंकराचार्य विवाद पर सीधा सवाल
मुख्यमंत्री ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति खुद को शंकराचार्य घोषित नहीं कर सकता और धार्मिक पदों की मर्यादा होती है। उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि अगर वे वास्तव में इतने सम्मानित धार्मिक पद पर थे, तो वाराणसी में उनके खिलाफ कार्रवाई और एफआईआर क्यों दर्ज की गई थी। योगी ने कहा कि धार्मिक आस्था का सम्मान जरूरी है, लेकिन व्यवस्था और नियमों से ऊपर कोई नहीं हो सकता।
कानून और मर्यादा पर सरकार का संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिम्मेदार व्यक्ति कभी ऐसा आचरण नहीं करता जिससे भीड़ में अफरा-तफरी फैले। उन्होंने बताया कि जहां से श्रद्धालु बाहर निकल रहे हों, वहां जबरन प्रवेश करने की कोशिश नई भगदड़ को जन्म दे सकती है। सरकार कानून का पालन करना भी जानती है और करवाना भी। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे लोगों को गुमराह कर रहे हैं, जबकि प्रशासन का काम सभी के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित माहौल बनाए रखना है।
कानून सबके लिए बराबर: मुख्यमंत्री
योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कहा कि कानून सबके लिए समान है- चाहे आम नागरिक हो या मुख्यमंत्री। उन्होंने कहा कि अगर वे खुद भी कोई अपराध करते हैं तो वही कानून उन पर भी लागू होगा। उनके अनुसार संवैधानिक व्यवस्था में कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं हो सकता। उन्होंने सभी नागरिकों से कानून और व्यवस्था का सम्मान करने की अपील करते हुए कहा कि मर्यादा और नियम ही समाज को संतुलित और सुरक्षित बनाए रखते हैं।