टीवी जगत से बेहद दुखद खबर सामने आई है. मशहूर निर्माता-निर्देशक रामानंद सागर के बेटे आनंद सागर का 13 फरवरी को निधन हो गया. लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे आनंद सागर आखिर जिंदगी की जंग हार गए. परिवार ने सोशल मीडिया के जरिए इस दुखद समाचार की जानकारी दी. उनके निधन से टीवी इंडस्ट्री और फैंस को बड़ा झटका लगा है. शुक्रवार शाम उनका अंतिम संस्कार मुंबई में किया गया. परिवार, करीबी और प्रशंसकों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी.
15 साल से गंभीर बीमारी से जंग
परिवार के मुताबिक, आनंद सागर पिछले करीब 15 सालों से पार्किंसन जैसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी से जूझ रहे थे. इस बीमारी ने धीरे-धीरे उनकी सेहत को कमजोर कर दिया. आखिरकार 13 फरवरी को उन्होंने अंतिम सांस ली. परिवार ने भावुक संदेश जारी करते हुए कहा कि सागर परिवार के प्रिय सदस्य अब हमारे बीच नहीं रहे. वह पारिवारिक प्रोडक्शन हाउस सागर आर्ट्स की दूसरी पीढ़ी के अहम सदस्य थे और पिता की विरासत को आगे बढ़ा रहे थे. उनके निधन से परिवार और इंडस्ट्री दोनों को गहरा आघात पहुंचा है.
‘रामायण’ की विरासत आगे बढ़ाई
टीवी इतिहास के सबसे लोकप्रिय धारावाहिकों में गिने जाने वाले रामायण को घर-घर तक पहुंचाने में सागर परिवार की बड़ी भूमिका रही है. पिता के निधन के बाद आनंद सागर ने भी इस विरासत को संभाला और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम किया. कोरोना काल के दौरान जब यह धारावाहिक फिर से प्रसारित हुआ, तब भी दर्शकों ने इसे उतना ही प्यार दिया. इस दोबारा प्रसारण को संभव बनाने में आनंद सागर की अहम भूमिका रही. उन्होंने हमेशा अपने पिता की बनाई पहचान को बनाए रखने की कोशिश की.
हमेशा याद रहेंगे आनंद सागर
आनंद सागर का जाना सिर्फ एक व्यक्ति का निधन नहीं, बल्कि एक रचनात्मक विरासत का बड़ा नुकसान है. उन्होंने पर्दे के पीछे रहकर भारतीय टीवी को कई यादगार पल दिए. फैंस सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं और उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना कर रहे हैं. परिवार और प्रशंसकों के लिए यह क्षति अपूरणीय है. जैसे उनके पिता ने भारतीय टीवी इतिहास में अमिट छाप छोड़ी, वैसे ही आनंद सागर भी अपनी रचनात्मकता और योगदान के लिए हमेशा याद किए जाएंगे.