हाल ही में संसद का माहौल उस वक्त गर्म हो गया जब एक लोकसभा सांसद ने जीएसटी को लेकर सरकार पर निशाना साधा. सांसद का आरोप था कि आम आदमी की रोजमर्रा की जरूरतों जैसे दूध, पेंसिल, शार्पनर और शिक्षा तक पर टैक्स लगाया जा रहा है. इस पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और सदन में तथ्य रखते हुए कहा कि जिम्मेदार जनप्रतिनिधि को गलत जानकारी फैलाने से बचना चाहिए. उन्होंने कहा कि तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना न सिर्फ गलत है, बल्कि जनता को भ्रमित करना भी है. वित्त मंत्री ने साफ कहा कि सरकार ने जरूरी सेवाओं को टैक्स से राहत देने की नीति अपनाई है.
दूध और डेयरी पर टैक्स का सच
वित्त मंत्री ने सबसे पहले दूध पर टैक्स के दावे को खारिज किया. उन्होंने स्पष्ट किया कि 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद से अब तक दूध पूरी तरह टैक्स फ्री है. यानी सामान्य दूध पर कोई जीएसटी नहीं लगता. इसके अलावा डेयरी उत्पादों को लेकर भी राहत का जिक्र किया गया. 3 सितंबर 2025 को हुई 56वीं जीएसटी काउंसिल बैठक में घी, मक्खन और पनीर जैसे उत्पादों पर टैक्स 12% से घटाकर 5% कर दिया गया. सरकार का कहना है कि इससे आम लोगों पर बोझ कम हुआ है. वित्त मंत्री ने सवाल उठाया कि बिना तथ्यों के ऐसे दावे करना उचित नहीं है.
शिक्षा और स्टेशनरी पर क्या नियम
शिक्षा को लेकर भी सरकार ने स्थिति साफ की. प्री-स्कूल से लेकर हायर सेकेंडरी तक की औपचारिक शिक्षा पर कोई जीएसटी नहीं है. जो पढ़ाई मान्यता प्राप्त डिग्री या योग्यता की ओर ले जाती है, वह भी टैक्स फ्री है. पेंसिल, शार्पनर, इरेज़र, नोटबुक और नक्शों पर भी जीरो जीएसटी लागू है. हालांकि विशेषज्ञ बताते हैं कि निजी कोचिंग, ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स या गैर-मान्यता प्राप्त ट्रेनिंग पर टैक्स लगता है. इसी तरह महंगे पेन, मार्कर या कुछ अन्य स्टेशनरी पर जीएसटी लागू हो सकता है. यानी जरूरी शैक्षणिक चीजों को राहत दी गई है, लेकिन व्यावसायिक सेवाओं पर अलग नियम हैं.
इलाज, बीमा और अंतिम संस्कार पर स्पष्टता
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी वित्त मंत्री ने भ्रम दूर किया. इलाज, जांच और डॉक्टरों की सेवाएं 2017 से ही जीरो जीएसटी में हैं. हालांकि अस्पताल में 5000 रुपये से ज्यादा किराये वाला कमरा (ICU को छोड़कर) लेने पर टैक्स लग सकता है. सरकार ने ‘नेक्स्ट जेन जीएसटी रिफॉर्म्स’ के तहत व्यक्तिगत हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस प्लान को भी 0% जीएसटी स्लैब में शामिल किया है. सांसद के अंतिम संस्कार पर टैक्स वाले दावे को भी गलत बताया गया. वित्त मंत्री ने साफ कहा कि अंतिम संस्कार सेवाओं पर कभी कोई जीएसटी नहीं लगाया गया.