अक्सर लोग गैस, एसिडिटी और सीने में जलन को ज्यादा मसालेदार खाना या ओवरईटिंग से जोड़ते हैं, लेकिन हर बार यही वजह नहीं होती। कई बार समस्या पेट में कम एसिड बनने की भी हो सकती है, जिसे लो स्टमक एसिड कहा जाता है। पेट में बनने वाला हाइड्रोक्लोरिक एसिड भोजन को तोड़ने, प्रोटीन पचाने और पोषक तत्वों को शरीर में अवशोषित करने में अहम भूमिका निभाता है। जब इसकी मात्रा कम हो जाती है, तो पाचन प्रक्रिया प्रभावित होने लगती है। उम्र बढ़ना, लंबे समय तक एंटासिड लेना, पोषण की कमी, तनाव, अनियमित खानपान और जिंक या विटामिन बी12 की कमी इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं।
कम एसिड होने पर क्यों बढ़ती जलन
जब पेट में पर्याप्त एसिड नहीं बनता, तो भोजन सही तरह से पच नहीं पाता और लंबे समय तक पेट में ही रुका रहता है। इससे गैस बनती है और पेट में दबाव बढ़ने लगता है। यही दबाव भोजन और एसिड को ऊपर की ओर धकेल सकता है, जिससे सीने में जलन, खट्टी डकार और गले में जलन महसूस होती है। कई बार लोगों को लगता है कि पेट में ज्यादा एसिड बन रहा है, जबकि असल में एसिड कम होने से पाचन गड़बड़ा रहा होता है। लंबे समय तक यह समस्या बनी रहे तो पेट भारी लगना, बार बार डकार आना और असहजता भी बढ़ सकती है।
एसिडिटी बढ़ाने वाले अन्य कारण
लो स्टमक एसिड के अलावा भी कई आदतें एसिडिटी को बढ़ा सकती हैं। अनियमित समय पर भोजन करना, ज्यादा चाय या कॉफी पीना, कार्बोनेटेड ड्रिंक का सेवन और तला भुना या प्रोसेस्ड फूड ज्यादा खाना पाचन को प्रभावित करता है। देर रात तक जागना और लगातार तनाव भी पेट पर असर डालते हैं। लंबे समय तक खाली पेट रहना या अचानक बहुत ज्यादा खाना भी समस्या बढ़ा सकता है। धूम्रपान और शराब पाचन तंत्र को कमजोर करते हैं, जबकि कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट और हार्मोनल बदलाव भी एसिडिटी को बढ़ावा दे सकते हैं।
बचाव के आसान और प्रभावी उपाय
एसिडिटी से बचने के लिए नियमित और संतुलित खानपान सबसे जरूरी है। एक बार में ज्यादा खाने के बजाय थोड़ी थोड़ी मात्रा में कई बार भोजन करना बेहतर माना जाता है। तला भुना और बहुत ज्यादा मसालेदार खाना सीमित रखें। भोजन के तुरंत बाद लेटने से बचें और हल्की वॉक करने की आदत डालें। दिन भर पर्याप्त पानी पिएं और तनाव कम करने के लिए योग या ध्यान अपनाएं। अगर एसिडिटी बार बार हो रही है, तो खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से जांच और सही सलाह लेना जरूरी है।