आज के डिजिटल दौर में फोटो और सेल्फी लेना लोगों की आदत बन चुका है. पारिवारिक समारोह हो, घूमने की जगह हो या कोई धार्मिक स्थल, हर मौके को कैमरे में कैद करना आम बात है. खासकर मंदिरों में दर्शन के दौरान लोग मूर्तियों के साथ तस्वीरें लेना चाहते हैं. लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हर स्थान पर फोटो लेना शुभ नहीं माना जाता. प्रख्यात ज्योतिषी डॉ. बसवराज गुरुजी के मुताबिक, मंदिर के गर्भगृह और वहां स्थापित मूल प्रतिमाओं के साथ फोटो खिंचवाने से बचना चाहिए. ऐसा करने से व्यक्ति की सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित हो सकती है और आध्यात्मिक संतुलन बिगड़ सकता है.
गर्भगृह और मूल प्रतिमा का महत्व
डॉ. बसवराज गुरुजी बताते हैं कि मंदिरों में स्थापित मूल मूर्तियां साधारण नहीं होतीं. इनमें प्राण प्रतिष्ठा की जाती है, जिससे उनमें दिव्य और अलौकिक ऊर्जा का वास होता है. वास्तु शास्त्र और शास्त्रीय विधियों के अनुसार इन प्रतिमाओं की स्थापना की जाती है. इनका नियमित अभिषेक और पूजन होता है, जिससे इनकी ऊर्जा और भी प्रबल हो जाती है. चूंकि ये प्रतिमाएं पृथ्वी तत्व के संपर्क में रहती हैं, इसलिए पंच तत्वों के संतुलन से जुड़ी होती हैं. ऐसे पवित्र और ऊर्जावान स्थान पर मोबाइल या कैमरे के साथ फोटो लेना आध्यात्मिक दृष्टि से उचित नहीं माना जाता.
नकारात्मक ऊर्जा से होता है नुकसान
ज्योतिषी के अनुसार, मनुष्य का शरीर हमेशा गतिशील रहता है और उसके भीतर कई तरह की नकारात्मक ऊर्जाएं भी मौजूद हो सकती हैं. जब ऐसी नकारात्मक ऊर्जा दिव्य ऊर्जा से युक्त मूर्तियों के संपर्क में आती है, तो ऊर्जा संतुलन बिगड़ सकता है. गुरुजी उदाहरण देते हैं कि जैसे सूर्य के साथ स्थित ग्रह अपनी शक्ति खो देते हैं, वैसे ही ईश्वर की शक्तिशाली मूर्ति के साथ तस्वीर लेने से मानव की सकारात्मक ऊर्जा कम होने लगती है. जब इन तस्वीरों को बार-बार देखा, साझा किया या सार्वजनिक किया जाता है, तो इसका प्रभाव धीरे-धीरे मन और जीवन पर पड़ता है.
कहां ले सकते हैं तस्वीरें
डॉ. बसवराज गुरुजी की सलाह है कि मंदिर परिसर में फोटो लेना पूरी तरह वर्जित नहीं है. भक्त मंदिर के बाहरी हिस्सों, प्रांगण, गोपुरम, सुंदर बगीचों या वातावरण की तस्वीरें ले सकते हैं. लेकिन गर्भगृह के भीतर, जहां मूल प्रतिमा स्थापित हो और पूजा या अभिषेक चल रहा हो, वहां फोटो नहीं लेनी चाहिए. इससे श्रद्धा और आस्था बनी रहती है और व्यक्ति की आध्यात्मिक ऊर्जा भी सुरक्षित रहती है. मंदिर में दर्शन का उद्देश्य फोटो नहीं, बल्कि मन की शांति और ईश्वर से जुड़ाव होना चाहिए.