प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 फरवरी को परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम के दौरान छात्रों से बातचीत करते हुए गेमिंग को लेकर अहम बातें कहीं। उन्होंने कहा कि आज के दौर में गेमिंग केवल समय बिताने का जरिया नहीं रह गया है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण कौशल और संभावित करियर विकल्प भी बन सकता है। पीएम मोदी ने छात्रों को समझाया कि अगर गेमिंग को सही सोच, अनुशासन और नैतिक मूल्यों के साथ अपनाया जाए, तो यह सोचने-समझने की क्षमता, रणनीति और फोकस को बेहतर बनाती है। उन्होंने कहा कि किसी भी चीज़ की तरह गेमिंग में भी संतुलन बहुत जरूरी है।
गेमिंग से विकसित होती हैं क्षमताएं
प्रधानमंत्री ने कहा कि गेमिंग में गति, निर्णय लेने की क्षमता और रणनीतिक सोच जैसे कई गुण विकसित होते हैं। यदि छात्र केवल समय पास करने के बजाय बेहतर गुणवत्ता वाले गेम चुनें और उसमें विशेषज्ञता हासिल करें, तो यह आत्म-विकास का माध्यम बन सकता है। पीएम मोदी ने छात्रों को यह भी बताया कि आज गेम डिजाइनिंग, एनिमेशन, ई-स्पोर्ट्स और कंटेंट क्रिएशन जैसे क्षेत्रों में करियर की अपार संभावनाएं हैं। सही दिशा में मेहनत करने से गेमिंग भविष्य का मजबूत आधार बन सकती है।
भारतीय कहानियों से बनें देसी गेम
पीएम मोदी ने छात्रों को भारतीय संस्कृति से प्रेरित गेम बनाने की खास सलाह दी। उन्होंने कहा कि भारत में पंचतंत्र, रामायण, महाभारत जैसी अनगिनत पौराणिक और प्रेरणादायक कहानियां मौजूद हैं। इन पर आधारित गेम न केवल रोचक होंगे बल्कि परिवार और समाज से भी जुड़ाव बढ़ाएंगे। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पंचतंत्र या हनुमान जी, अभिमन्यु जैसी कथाओं पर गेम बनाए जा सकते हैं, जिससे नए विचार और रचनात्मक सोच को बढ़ावा मिलेगा।
ऑनलाइन जुए से रहें सावधान
प्रधानमंत्री ने छात्रों को ऑनलाइन गेमिंग में छिपे खतरों को लेकर भी चेताया। उन्होंने कहा कि सस्ता डेटा होने की वजह से दिनभर गेमिंग में डूबे रहना सही नहीं है। खासतौर पर उन गेम्स से दूर रहने की सलाह दी, जिनमें ऑनलाइन सट्टेबाजी या जुआ शामिल होता है। पीएम मोदी ने बताया कि देश में ऑनलाइन जुए के खिलाफ कानून बनाए गए हैं और युवाओं को इससे सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि गेमिंग में रुचि अच्छी बात है, लेकिन जिम्मेदारी और समझ के साथ।