तमिल सिनेमा के सुपरस्टार थलपति विजय इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म जन नेता (जन नायगन) को लेकर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह उनकी फिल्म नहीं बल्कि कानूनी परेशानी है। मद्रास हाई कोर्ट ने विजय को बड़ा झटका देते हुए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा लगाए गए 1.5 करोड़ रुपये के जुर्माने के खिलाफ उनकी याचिका खारिज कर दी है। यह मामला उनकी फिल्म के सेंसर सर्टिफिकेट से अलग है, लेकिन कोर्ट का फैसला विजय के लिए राहत भरा नहीं रहा।
15 करोड़ की आय छिपाने का आरोप
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2015-16 के दौरान थलपति विजय ने करीब 15 करोड़ रुपये की आय का खुलासा नहीं किया था। यह आय उनकी फिल्म पुली से जुड़ी बताई गई है। इसी आधार पर विभाग ने उन पर 1.5 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। जुर्माने के आदेश को चुनौती देते हुए विजय ने मद्रास हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन कोर्ट ने उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया।
कोर्ट ने क्यों नहीं दी राहत
विजय की याचिका को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति सेंथिलकुमार राममूर्ति ने कहा कि आयकर विभाग द्वारा जुर्माना लगाने का आदेश तय समय-सीमा के भीतर पारित किया गया था। ऐसे में इस आदेश में दखल देने का कोई ठोस आधार नहीं बनता। कोर्ट ने साफ किया कि कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आदेश वैध है और इसमें हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। इससे पहले 23 जनवरी को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया था।
अपील का रास्ता अब भी खुला
सुनवाई के दौरान विजय की ओर से पेश वकील ने कोर्ट से आदेश को चुनौती देने की छूट देने का अनुरोध किया। इस पर न्यायाधीश ने कहा कि याचिकाकर्ता के पास अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष आदेश को चुनौती देने का अधिकार मौजूद है। गौरतलब है कि साल 2015 में आयकर विभाग ने विजय के आवास पर छापेमारी की थी। उसी दौरान मिले दस्तावेजों के आधार पर उन पर आय छिपाने का आरोप लगाया गया था। अब देखना होगा कि विजय आगे कौन सा कानूनी कदम उठाते हैं।