Gold and Silver में दशक की सबसे बड़ी बिकवाली, एक दिन में उड़ गया मुनाफा, निवेशक सहमे

शुक्रवार को कीमती धातुओं के बाजार में बीते एक दशक से भी ज्यादा की सबसे बड़ी बिकवाली देखने को मिली। चांदी एक ही दिन में 15% से ज्यादा टूट गई, जो 2011 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। वहीं सोना भी 7% से ज्यादा फिसल गया, जो 2013 के बाद इसका सबसे खराब दिन रहा। खास बात यह रही कि यह तेज गिरावट रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के ठीक अगले दिन आई, जिससे निवेशकों में घबराहट फैल गई।

MCX और ETF में भारी नुकसान

घरेलू बाजार में MCX पर मार्च डिलीवरी वाली चांदी 17% तक गिरकर ₹3,32,002 पर पहुंच गई। MCX गोल्ड फ्यूचर्स में भी करीब 9% की गिरावट दर्ज की गई और भाव ₹1,54,157 तक आ गए। ETF निवेशकों के लिए हालात और ज्यादा खराब रहे। SBI सिल्वर ETF 22.4%, ICICI प्रूडेंशियल सिल्वर ETF 21% और निप्पॉन इंडिया सिल्वर ETF करीब 19.5% टूट गया। गोल्ड ETF भी दबाव में रहे, जहां निप्पॉन गोल्ड ETF 10% और ICICI प्रूडेंशियल गोल्ड ETF 9.5% नीचे बंद हुआ।

फेड चेयर से बढ़ा दबाव

विशेषज्ञों के मुताबिक इस भारी गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व से जुड़ी उम्मीदें हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा केविन वार्श को अगला फेड चेयर नामित किए जाने की खबर से बाजार में हलचल मच गई। वार्श को महंगाई पर सख्त रुख अपनाने वाला माना जाता है। इससे डॉलर मजबूत हुआ और सोना-चांदी जैसी कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ गया। मजबूत डॉलर आमतौर पर इन धातुओं की कीमतों के लिए नकारात्मक माना जाता है।

आगे निवेशकों के लिए क्या

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी हालात कुछ अलग नहीं रहे। चांदी 15% से ज्यादा गिरकर $98 प्रति औंस तक आ गई और $100 का अहम स्तर टूट गया। सोना भी 7% से ज्यादा फिसलकर $5,000 से नीचे चला गया। एक्सपर्ट्स का कहना है कि चांदी की कीमतें ज्यादा उतार-चढ़ाव वाली होती हैं और तेज तेजी के बाद इसमें करेक्शन आम बात है। ज्यादातर विश्लेषक इस गिरावट को लंबी तेजी के बाद हेल्दी करेक्शन मान रहे हैं, न कि तेजी का अंत। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि जोखिम संभालकर चलें, मुनाफा बुक करें और आने वाले दिनों में अस्थिरता के लिए तैयार रहें।

Rishabh Chhabra
Author: Rishabh Chhabra