American धमकी बेअसर! ट्रंप की चेतावनी के बावजूद रूस से तेल खरीदेगा भारत, रिलायंस का बड़ा दांव

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से रूसी तेल खरीदने को लेकर दी गई धमकियों का भारत पर खास असर नहीं दिख रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह भारत की दिग्गज निजी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज है, जो लगातार रूसी कच्चा तेल खरीदने की तैयारी में है। अंतरराष्ट्रीय दबाव और प्रतिबंधों के बावजूद भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को प्राथमिकता दे रहा है। यही कारण है कि रूसी तेल अब भी भारतीय रिफाइनरियों के लिए अहम बना हुआ है।

फरवरी से रूसी तेल की नई खेप

रिलायंस इंडस्ट्रीज फरवरी महीने से रोजाना करीब 1.5 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल खरीदेगी। यह तेल उन कंपनियों या बिचौलियों से लिया जाएगा, जिन पर किसी तरह का अमेरिकी या अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध नहीं है। इंडिया एनर्जी वीक के दौरान कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। हालांकि, कंपनी की नीति के तहत अधिकारी ने अपना नाम और विक्रेताओं के नाम उजागर नहीं किए। रिलायंस ने इस पर आधिकारिक टिप्पणी भी नहीं की।

रॉयटर्स रिपोर्ट और प्रतिबंधों की कहानी

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस एक महीने के अंतराल के बाद फरवरी और मार्च में फिर से रूसी तेल खरीदेगी। कंपनी को आखिरी बार दिसंबर में रूस से कच्चा तेल मिला था। तब अमेरिका ने एक महीने की विशेष छूट दी थी, जिसके तहत रिलायंस ने 21 नवंबर की समय-सीमा के बाद भी रोसनेफ्ट के साथ अपना सौदा पूरा किया। अमेरिका ने अक्टूबर में रोसनेफ्ट और लुकोइल जैसी रूसी तेल कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन गैर-प्रतिबंधित कंपनियां अब भी तेल बेच रही हैं।

जामनगर रिफाइनरी और वैकल्पिक स्रोत

रिलायंस पहले गुजरात के जामनगर स्थित अपने विशाल रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स के लिए रोसनेफ्ट से रोजाना लगभग 5 लाख बैरल तेल आयात करती थी। इसके अलावा कंपनी सऊदी अरब, इराक और कनाडा से भी कच्चा तेल खरीदती है। हाल ही में यह भी खबर आई है कि रिलायंस वेनेजुएला से फिर से तेल खरीदने के लिए अमेरिका से अनुमति मांग रही है। इसका मकसद रूसी तेल पर निर्भरता कम करना और सप्लाई को सुरक्षित बनाना है।

Rishabh Chhabra
Author: Rishabh Chhabra