पुखराज को वैदिक ज्योतिष का सबसे शुभ रत्न माना जाता है। यह गुरु या बृहस्पति ग्रह से जुड़ा होता है, जो ज्ञान, बुद्धि, धर्म, समृद्धि और ईश्वर की कृपा का प्रतीक है। जब कुंडली में गुरु मजबूत होता है, तो व्यक्ति को सही मार्गदर्शन, सम्मान और जीवन में स्थिरता मिलती है। लेकिन अगर गुरु कमजोर हो, तो धन की परेशानी, विवाह में देरी, पढ़ाई में रुकावट और सही सलाह की कमी महसूस हो सकती है। ऐसे में पुखराज गुरु की सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने में मदद करता है।
पुखराज का प्रभाव और महत्व
पुखराज सिर्फ धन बढ़ाने वाला रत्न नहीं है, बल्कि यह नैतिकता, सही कर्म और उच्च सोच से जुड़ा माना जाता है। ज्योतिष में इसे शिक्षा, कानून, काउंसलिंग, फाइनेंस और आध्यात्मिक क्षेत्रों के लिए बेहद लाभकारी माना गया है। महिलाओं के लिए पुखराज को वैवाहिक सुख, पति का सहयोग और पारिवारिक सुरक्षा से जोड़ा जाता है। धार्मिक ग्रंथों में गुरु को देवताओं का शिक्षक कहा गया है, इसलिए पुखराज को बुद्धि, आस्था और विश्वास बढ़ाने वाला रत्न माना जाता है।
आध्यात्मिक और व्यावहारिक लाभ
जो लोग आध्यात्मिक मार्ग पर चलते हैं, उनके लिए पुखराज धैर्य, भक्ति और संतुलन बढ़ाता है। यह सांसारिक जिम्मेदारियों और आध्यात्मिक सोच के बीच संतुलन बनाने में सहायक होता है। व्यावहारिक रूप से पुखराज हल्के पीले से गहरे सुनहरे रंग का होता है। साफ, पारदर्शी और चमकदार पुखराज सबसे अच्छा माना जाता है। आमतौर पर 5 से 7 रत्ती पुखराज पहनने की सलाह दी जाती है, लेकिन सही वजन कुंडली और शरीर के अनुसार तय होना चाहिए।
पहनने से पहले जरूरी सावधानियां
एक बड़ी गलती यह होती है कि लोग बिना कुंडली देखे सिर्फ धन के लिए पुखराज पहन लेते हैं। अगर कुंडली में गुरु अशुभ हो, तो पुखराज पहनने से गलत आत्मविश्वास, वजन बढ़ना या अव्यावहारिक उम्मीदें पैदा हो सकती हैं। इसलिए पुखराज पहनने से पहले कुंडली जांच और 57 दिन का ट्रायल बेहद जरूरी है। इसे सोने में, दाहिने हाथ की तर्जनी उंगली में, गुरुवार सुबह शुक्ल पक्ष में पहनना शुभ माना जाता है। सही व्यक्ति के लिए पुखराज जीवन में समझदारी, समृद्धि और गरिमा लाता है।