ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के फिर से बंकर में छिपने की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि उन्हें अमेरिका से जान का खतरा महसूस हो रहा है। बीते सात महीनों में यह दूसरी बार है जब खामेनेई को सुरक्षा कारणों से बंकर में जाना पड़ा है। इससे पहले जून 2025 में भी वे करीब 21 दिनों तक बंकर में छिपे रहे थे। ईरान की सरकार ने इस कदम पर आधिकारिक तौर पर कोई पुष्टि नहीं की है, लेकिन स्थानीय मीडिया इसे गंभीर सुरक्षा खतरे से जोड़कर देख रहा है।
अमेरिकी धमकी से बढ़ा तनाव
एक न्यूज़ चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के राष्ट्रपति ने खामेनेई को लेकर कड़े बयान दिए थे और उनकी तुलना कासिम सुलेमानी या अबू बक्र अल बगदादी जैसे लोगों से की थी। ईरान ने इस बयान को सीधे खतरे के रूप में लिया। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा है कि अगर खामेनेई पर कोई हमला हुआ, तो इसे देश पर सीधा युद्ध माना जाएगा। इस बयान के बाद मध्य-पूर्व में तनाव और ज्यादा बढ़ गया है। ईरानी प्रशासन ने सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा है।
अमेरिका से डरने की बड़ी वजह
ईरान की चिंता सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं है। हाल ही में अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को काराकास से कथित रूप से उठाकर ले जाने की खबरों ने भी डर बढ़ा दिया है। कहा जा रहा है कि मादुरो को उनके घर से ही हिरासत में लिया गया था और अब वे अमेरिकी जेल में हैं। अमेरिका ने उन पर ड्रग्स नेटवर्क चलाने का आरोप लगाया था। इस घटना ने कई देशों को चौंका दिया है, और ईरान को डर है कि अमेरिका ऐसा ही कोई कदम उसके साथ भी उठा सकता है।
क्यों निशाने पर हैं खामेनेई?
खामेनेई ईरान के सबसे ताकतवर व्यक्ति हैं। देश के सभी बड़े फैसले उन्हीं के हाथ में होते हैं। अमेरिका लंबे समय से ईरानी शासन के खिलाफ है और खामेनेई को इसका सबसे बड़ा चेहरा माना जाता है। वे खुले तौर पर अमेरिका के विरोधी हैं और उसे “शैतान” तक कह चुके हैं। इसके अलावा, अमेरिका ईरान को चारों ओर से घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है। मलक्का की खाड़ी में अमेरिकी युद्धपोत तैनात किए गए हैं और जॉर्डन में फाइटर जेट्स की मौजूदगी ने हालात और तनावपूर्ण बना दिए हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले दिन ईरान और अमेरिका के रिश्तों के लिए बेहद निर्णायक हो सकते हैं।