उत्तर प्रदेश के अमरोहा की रहने वाली एक युवती की दिल्ली के आरएमएल अस्पताल में मौत के बाद सनसनी फैल गई। एमआरआई रिपोर्ट में युवती के दिमाग में करीब 25 गांठें पाई गईं। शुरुआती आशंका जताई गई कि यह गांठें पत्ता गोभी में मौजूद कीड़े की वजह से बनीं, जो दिमाग तक पहुंच गया। इसके बाद लोगों के मन में डर बैठ गया कि क्या वाकई पत्ता गोभी खाने से ऐसा हो सकता है। सोशल मीडिया और आम बातचीत में यह सवाल तेजी से फैलने लगा कि क्या सब्जियों में मौजूद कीड़े इंसान के दिमाग तक पहुंच सकते हैं।
पत्ता गोभी वाला दावा कितना सही
एम्स दिल्ली में बायोटेक्नोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार के मुताबिक, पत्ता गोभी में दिमाग तक जाने वाले कीड़े की बात पूरी तरह मिथ है। मेडिकल साइंस में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है। हालांकि, जमीन पर उगने वाली सब्जियों में टी. सोलियम नाम का एक परजीवी हो सकता है, जो बेहद सूक्ष्म होता है और आंखों से दिखाई नहीं देता। यह परजीवी तब सब्जियों पर आता है, जब कोई संक्रमित जानवर उन पर मल या मूत्र कर देता है। यानी समस्या पत्ता गोभी नहीं, बल्कि साफ-सफाई की कमी से जुड़ी होती है।
परजीवी से कैसे बनती है बीमारी
डॉ. अशोक बताते हैं कि अगर कोई व्यक्ति परजीवी से संक्रमित सब्जी खा लेता है, तो यह परजीवी पेट में पहुंचकर अंडे देता है। इससे सिस्टिसर्कोसिस नाम की बीमारी हो सकती है। परजीवी के अंडे आंतों में फूटते हैं और शरीर के अलग-अलग टिश्यू में जाकर सिस्ट बना लेते हैं। जब यही सिस्ट दिमाग में पहुंच जाते हैं, तो इसे न्यूरोसिस्टिसर्कोसिस कहा जाता है, जो बेहद गंभीर और जानलेवा हो सकता है। मैक्स अस्पताल के न्यूरोसर्जन डॉ. दलजीत सिंह के मुताबिक, यह परजीवी सिर्फ पत्ता गोभी नहीं, बल्कि पालक, ब्रोकली, शिमला मिर्च और अधपके पोर्क में भी हो सकता है।
बचाव और इलाज क्या है
डॉक्टरों का कहना है कि इस बीमारी से बचाव आसान है। सब्जियों को अच्छी तरह धोना, उनकी पहली परत हटाना और साफ जगह से सब्जियां खरीदना बेहद जरूरी है। हाथ धोकर भोजन करने की आदत भी संक्रमण से बचा सकती है। अगर परजीवी सिर्फ पेट तक सीमित हो, तो दवाओं से इसका इलाज संभव है। लेकिन अगर संक्रमण दिमाग तक पहुंच जाए, तो इलाज जटिल और जोखिम भरा हो जाता है। इसलिए डरने की नहीं, बल्कि सतर्क रहने की जरूरत है। सही जानकारी और साफ-सफाई ही इस तरह की गंभीर बीमारियों से सबसे बड़ा बचाव है।