पौष पूर्णिमा का पावन पर्व शनिवार, 3 जनवरी 2026 को पूरे देश में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। यह तिथि स्नान, दान और पुण्य कर्मों के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन किया गया दान कई गुना फल देता है और जीवन में चल रहे संकटों को दूर करता है। पौष पूर्णिमा भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है, इसलिए इस दिन दान करने से विष्णु कृपा प्राप्त होती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन के पुण्य कर्म ग्रह दोष, मानसिक तनाव और दरिद्रता को दूर करने में सहायक होते हैं।
अन्न दान से आर्थिक संकट दूर
पौष पूर्णिमा पर अन्न दान को सबसे श्रेष्ठ माना गया है। चावल, गेहूं, दाल, ज्वार या अन्य अनाज का दान करने से आर्थिक परेशानियां कम होती हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि जो व्यक्ति इस दिन अन्न दान करता है, उसके घर में कभी भोजन की कमी नहीं होती। मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और धन संबंधी रुकावटें धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं। विशेष रूप से जरूरतमंद, साधु-संत या गरीब परिवार को अन्न दान करने से पुण्य में कई गुना वृद्धि होती है।
वस्त्र, कंबल, तिल-गुड़ दान का फल
शीत ऋतु में पड़ने वाली पौष पूर्णिमा पर वस्त्र और कंबल का दान विशेष महत्व रखता है। गरीबों और असहाय लोगों को गर्म कपड़े या कंबल देने से रोग, भय और कष्टों का नाश होता है। वहीं तिल और गुड़ का दान पाप नाशक माना गया है। तिल नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और गुड़ जीवन में मिठास और सकारात्मकता लाता है। इस दिन तिल-गुड़ का दान करने से मानसिक शांति मिलती है और पुराने पापों से मुक्ति का मार्ग खुलता है।
दीप दान और दान की सावधानियां
पौष पूर्णिमा के दिन दीप दान करने से जीवन का अंधकार दूर होता है। मंदिर, नदी तट या घर के बाहर दीपक जलाने से आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। दान करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। दान हमेशा श्रद्धा और अपनी सामर्थ्य के अनुसार करें। अहंकार से बचें और जरूरतमंद व्यक्ति को सम्मानपूर्वक दान दें। ऐसा करने से दान का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है और जीवन के संकट धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं।