इंडिगो फ्लाइट क्राइसिस को लेकर संसद की स्थायी समिति ने एयरलाइन और नियामक संस्था पर कड़ा रुख अपनाया है। सूत्रों के अनुसार, समिति IndiGo और DGCA के जवाबों से संतुष्ट नहीं हुई। दोनों के अधिकारी समिति के सामने पेश तो हुए, लेकिन सवालों के स्पष्ट और ठोस जवाब नहीं दे पाए। इसी वजह से समिति ने उन्हें 15 दिन बाद दोबारा पेश होने का निर्देश दिया है।
कौन-कौन रहा बैठक में मौजूद
बैठक में इंडिगो की ओर से सीओओ के नेतृत्व में अधिकारियों की टीम शामिल हुई, जबकि डीजीसीए और नागरिक उड्डयन मंत्रालय की तरफ से सचिव समीर कुमार सिन्हा पेश हुए। इसके अलावा एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस, स्पाइसजेट और आकाशा एयर के प्रतिनिधि भी बैठक में मौजूद थे। गौरतलब है कि इंडिगो ने 2 दिसंबर से कई दिनों तक देशभर में सैकड़ों उड़ानें रद्द की थीं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
जेडीयू सांसद संजय झा की अध्यक्षता
यह बैठक परिवहन, पर्यटन और संस्कृति मंत्रालय से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति की थी, जिसकी अध्यक्षता जेडीयू सांसद संजय झा कर रहे हैं। समिति इस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी कि उड़ानें रद्द होने और एयरपोर्ट पर मची अफरा-तफरी की सीधी जिम्मेदारी किसकी है। इसलिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय की जांच रिपोर्ट आने तक अंतिम फैसला टाल दिया गया।
FDTL नियमों पर तीखे सवाल
सूत्रों के मुताबिक, कई सदस्यों ने पूछा कि संशोधित फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन यानी FDTL नियम लागू होने के बाद क्या मंत्रालय और एयरलाइन ऐसी स्थिति के लिए तैयार थे। यह भी सवाल उठा कि क्या पायलटों की ड्यूटी से जुड़ी नई व्यवस्था से राहत पाने के लिए इंडिगो ने दबाव बनाने की रणनीति अपनाई। इन सवालों पर इंडिगो और डीजीसीए के जवाब समिति को संतोषजनक नहीं लगे।
15 दिन बाद फिर पेश होने का आदेश
यात्रियों को हुई असुविधा पर माफी मांगने के बजाय दोनों पक्षों ने मौसम और तकनीकी कारणों को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की। इस रवैये से नाराज समिति ने इंडिगो और डीजीसीए दोनों को 15 दिन बाद फिर से पेश होने को कहा। साथ ही मंत्रालय की चार सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट का इंतजार करने का फैसला किया गया, जो 28 दिसंबर तक आने की उम्मीद है।
यात्रियों की परेशानी पर नाराजगी
बैठक में सदस्यों ने उड़ानों के रद्द होने से हजारों यात्रियों को हुई दिक्कतों पर कड़ी नाराजगी जताई। सांसदों ने बताया कि संसद सत्र के दौरान दिल्ली में मौजूद कई सांसदों को भी उड़ान रद्द होने और देरी की वजह से परेशानी उठानी पड़ी। यात्रियों और एयरलाइन के बीच सही जानकारी न पहुंच पाने और किराए बढ़ने जैसे मुद्दे भी उठाए गए।
सरकार को दिए अहम सुझाव
संसदीय समिति ने भविष्य में ऐसे हालात दोबारा न बनने देने के लिए डीजीसीए और एयरलाइनों की कार्यप्रणाली पर लगातार और सख्त निगरानी की सिफारिश की। साथ ही सरकार को सुझाव दिया गया कि FDTL नियमों पर कोई अंतिम फैसला लेने से पहले अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को शामिल किया जाए और वैश्विक स्तर के बेस्ट स्टैंडर्ड का गहराई से अध्ययन किया जाए।