भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक चुनावों के जरिए नई लीडरशिप को आकार दे दिया है। केंद्र से लेकर प्रदेश स्तर तक ऐसे नेताओं को प्रमुख जिम्मेदारी दी गई है, जिनकी उम्र 60 साल या उसके आसपास है। पार्टी ने साफ संकेत दिया है कि वह भविष्य की राजनीति के लिए युवा और अपेक्षाकृत नई टीम पर भरोसा कर रही है। इसी क्रम में 45 साल के नितिन नबीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है, जो इस बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।
2029 के चुनाव पर नजर
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक बीजेपी ने यह संगठनात्मक ढांचा खास तौर पर 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर तैयार किया है। पार्टी में किसी भी अध्यक्ष का न्यूनतम कार्यकाल तीन साल का होता है, इसलिए अभी चुनी गई टीम लंबे समय तक संगठन को दिशा देगी। 2024 के चुनाव में पूर्ण बहुमत से थोड़ी दूरी के बाद बीजेपी अब कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।
संसदीय बोर्ड की भूमिका
बीजेपी के भीतर संसदीय बोर्ड को सबसे शक्तिशाली इकाई माना जाता है। यही बोर्ड पार्टी के बड़े फैसले करता है और इसे हाईकमान भी कहा जाता है। फिलहाल संसदीय बोर्ड में 11 सदस्य हैं, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा जैसे दिग्गज शामिल हैं। इस बोर्ड के सदस्यों की औसत उम्र करीब 69 साल है, जो अनुभव और स्थिरता का संकेत देती है।
प्रदेश अध्यक्षों में उम्र का संतुलन
प्रदेश स्तर पर बीजेपी ने उम्र को लेकर संतुलन साधा है। पार्टी ने लगभग आधे प्रदेश अध्यक्ष ऐसे बनाए हैं, जिनकी उम्र 55 साल से कम है। बिहार, आंध्र प्रदेश, गुजरात, असम, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में 50 से 56 साल के नेताओं को कमान सौंपी गई है। वहीं उत्तर प्रदेश, केरल और मध्य प्रदेश में 61 साल के नेताओं को अध्यक्ष बनाया गया है, जिससे अनुभव और युवा सोच का मेल दिखता है।
मुख्यमंत्रियों की औसत उम्र
बीजेपी शासित राज्यों में मुख्यमंत्रियों की औसत उम्र करीब 55 साल है। पार्टी के सबसे उम्रदराज मुख्यमंत्री त्रिपुरा के माणिक साहा हैं, जबकि अरुणाचल प्रदेश के पेमा खांडू सबसे युवा मुख्यमंत्री हैं। इससे साफ है कि बीजेपी शासन स्तर पर भी अपेक्षाकृत युवा नेतृत्व को बढ़ावा दे रही है। इसके मुकाबले कांग्रेस शासित राज्यों में मुख्यमंत्रियों की औसत उम्र ज्यादा बताई जाती है।
सियासी मायने और संदेश
नई लीडरशिप के जरिए बीजेपी संगठन में नए और पुराने नेताओं के बीच संतुलन बनाना चाहती है। इससे पार्टी कार्यकर्ताओं और नए सदस्यों को यह संदेश जाता है कि संगठन में आगे बढ़ने के अवसर मौजूद हैं। 2024 के बाद पार्टी ने 10 करोड़ सदस्य बनाए, जिनमें बड़ी संख्या नए लोगों की है। नई नेतृत्व संरचना के साथ बीजेपी 2029 के चुनाव में पूरी मजबूती से उतरने की तैयारी कर रही है।