भारत की एक बड़ी आबादी आज विटामिन B12 की कमी से जूझ रही है, जो आने वाले समय में गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन सकती है. कई रिपोर्ट्स के अनुसार देश में करीब 47 प्रतिशत लोगों में विटामिन B12 की कमी पाई गई है. यह समस्या खासतौर पर शाकाहारी लोगों में ज्यादा देखने को मिलती है. विटामिन B12 की कमी से शरीर में खून बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है और नसों पर भी सीधा असर पड़ता है, जिससे कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.
शाकाहारियों में खतरा क्यों ज्यादा
विटामिन B12 प्राकृतिक रूप से मुख्य रूप से पशु आधारित खाद्य पदार्थों जैसे दूध, दही, अंडा, मछली और मांस में पाया जाता है. भारत में बड़ी संख्या में लोग शुद्ध शाकाहारी हैं, जिसके कारण उन्हें भोजन से पर्याप्त मात्रा में B12 नहीं मिल पाता. यही वजह है कि शाकाहारी लोगों में इस विटामिन की कमी ज्यादा देखी जाती है और लंबे समय तक यह कमी बनी रहे तो स्वास्थ्य पर इसके गंभीर दुष्परिणाम हो सकते हैं.
इंस्टाग्राम वीडियो से उठा अहम सवाल
हाल ही में इंस्टाग्राम पर वायरल हुए एक वीडियो ने इस विषय को फिर से चर्चा में ला दिया है. “शुद्ध शाकाहारी लोगों में क्यों होती है विटामिन B12 की कमी” नाम के इस वीडियो में डॉक्टर प्रियंका सहरावत ने इस समस्या को सरल भाषा में समझाया है. यह वीडियो इसलिए भी अहम है क्योंकि यह लोगों को अपनी सेहत के प्रति जागरूक करने का काम करता है.
डॉक्टर ने बताई कमी की असली वजह
दिल्ली एम्स से जुड़ी न्यूरोलॉजिस्ट और जनरल फिजिशियन डॉ प्रियंका सहरावत ने वीडियो में बताया कि पौधों को विटामिन B12 की जरूरत नहीं होती, इसलिए वे इसे बना नहीं पाते. इसी कारण शाकाहारी आहार में यह विटामिन प्राकृतिक रूप से मौजूद नहीं होता. जबकि मानव शरीर को नसों के सही कामकाज, खून बनने और दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए विटामिन B12 की पर्याप्त मात्रा की जरूरत होती है.
खून पर पड़ने वाला असर
विटामिन B12 की कमी से शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण प्रभावित होता है. इससे हीमोग्लोबिन कम हो सकता है और एनीमिया जैसी स्थिति पैदा हो जाती है. खून की गुणवत्ता खराब होने से थकान, कमजोरी और चक्कर आने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित होती है.
नसों और दिमाग के लिए क्यों जरूरी है B12
विटामिन B12 न केवल खून बल्कि नसों और दिमाग के लिए भी बेहद जरूरी है. यह नसों को ढकने वाली सुरक्षात्मक परत को बनाए रखने में मदद करता है. इसकी कमी से हाथ-पैरों में झनझनाहट, याददाश्त कमजोर होना और मूड में बदलाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए समय रहते इस कमी को समझना और जागरूक होना बेहद जरूरी है.