वोट चोरी और चुनाव सुधारों पर चल रही बहस के बीच कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मंगलवार को केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए थे। बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में खड़े होकर इन सवालों का एक-एक करके विस्तार से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अतीत में खुद जो परंपराएं चलाती रही, अब उन्हीं पर सवाल उठा रही है।
चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर पुरानी परंपरा
अमित शाह ने बताया कि स्वतंत्र भारत के 73 वर्षों तक चुनाव आयोग की नियुक्ति के लिए कोई अलग कानून नहीं था। प्रधानमंत्री ही मुख्य चुनाव आयुक्त व चुनाव आयुक्तों के नाम राष्ट्रपति को भेजते थे और वह मंजूर हो जाते थे। उन्होंने कहा कि 1950 से 1989 तक सिर्फ एक ही सीईसी होते थे और कांग्रेस सरकारें इसी व्यवस्था को बिना किसी पारदर्शिता के चलाती रहीं। शाह ने यह भी दावा किया कि कुल 29 चुनाव आयुक्त सीधे प्रधानमंत्री के प्रस्ताव पर चुने गए। आज जब मोदी सरकार ने पारदर्शी प्रक्रिया बनाई है तो कांग्रेस सवाल खड़े कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और नई चयन समिति
शाह ने आगे कहा कि 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने अधिक पारदर्शिता की जरूरत बताई, जिसके बाद एक चयन समिति बनाई गई, जिसमें प्रधानमंत्री, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया और नेता प्रतिपक्ष शामिल हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को यह इसलिए खटक रहा है क्योंकि वह मानती है कि समिति में उनकी संख्या कम है, जबकि असल फैसला देश की जनता के हाथ में होता है।
CCTV फुटेज हटाने पर उठे सवाल
राहुल गांधी के दूसरे सवाल पर शाह ने स्पष्ट किया कि सीसीटीवी रिकॉर्डिंग हटाने की समय सीमा जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 81 से जुड़ी है। इस धारा के मुताबिक चुनाव नतीजे के बाद 45 दिन तक ही कोई याचिका दायर की जा सकती है। जब कानूनी चुनौती की अवधि 45 दिन है, तो फुटेज को उससे ज्यादा रखने का कोई औचित्य नहीं। शाह के अनुसार चुनाव आयोग ने यह नियम बाद में सर्कुलर के माध्यम से जोड़ा था और स्पष्ट किया था कि यह संवैधानिक दस्तावेज नहीं है। उन्होंने कहा कि फुटेज मांगनी है तो प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं, कोर्ट का रास्ता अपनाइए।
चुनाव आयोग को कानूनी सुरक्षा पर स्पष्टीकरण
राहुल गांधी के तीसरे सवाल चुनाव आयोग को दी गई इम्युनिटी पर अमित शाह ने कहा कि यह प्रावधान पुराना है और 1950 के कानून में ही मौजूद था। चुनाव प्रक्रिया के दौरान लिए गए फैसलों पर मुख्य चुनाव आयुक्त या आयुक्तों पर मुकदमा नहीं चल सकता। शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने इसमें कुछ नया नहीं जोड़ा, बल्कि मौजूदा प्रावधान को और स्पष्ट किया है।