यशस्वी जायसवाल ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज का अंत यादगार अंदाज़ में किया। पहले दो मैचों में नाकामी के बाद जब उन पर दबाव बढ़ गया था, तब निर्णायक मुकाबले में उन्होंने करियर की सबसे बेहतरीन पारी खेली और वनडे इंटरनेशनल में अपना पहला शतक ठोक दिया। विशाखापत्तनम में खेले गए इस मैच में जायसवाल ने शुरुआत में धैर्य दिखाया, लेकिन लय मिलने के बाद उन्होंने चौके-छक्कों की बारिश कर दी। 36वें ओवर में उन्होंने 111 गेंदों में अपना शतक पूरा किया और दिखा दिया कि क्यों उन्हें भारत का भविष्य ओपनर कहा जाता है।
मौका मिला तो किया खुद को साबित
शुभमन गिल की चोट के कारण इस सीरीज में ओपनिंग करने का मौका यशस्वी को मिला था। इससे पहले वह सिर्फ एक वनडे मैच खेले थे, जो साल की शुरुआत में आया था। लंबे इंतजार के बाद जैसे ही नया अवसर मिला, वह इसे भुनाना चाहते थे, लेकिन शुरुआत आसान नहीं रही। पहले वनडे में वह केवल 18 रन बना सके और दूसरे मैच में 22 रन पर आउट हो गए। लगातार दो असफल पारियों ने उनके आत्मविश्वास पर असर डाला, लेकिन तीसरे मैच में उन्होंने उस दबाव को ताकत में बदल दिया और बड़ा स्कोर बनाकर सभी सवालों का जवाब दे दिया।
धीमी शुरुआत से धमाकेदार शतक तक का सफर
आखिरी वनडे में भारत 271 रन के लक्ष्य का पीछा कर रहा था और शुरुआत से ही सावधानी की जरूरत थी। जायसवाल भी पिछले मैचों की तरह शुरू में लय नहीं पा रहे थे। गेंद रुककर आ रही थी और रन आसानी से नहीं बन रहे थे, लेकिन उन्होंने जल्दबाजी नहीं की। रोहित शर्मा के साथ साझेदारी करते हुए उन्होंने पारी को संभाला और धीरे-धीरे अपनी लय पकड़ी। 75 गेंदों में उन्होंने पहला अर्धशतक पूरा किया, लेकिन इसके बाद उनका गियर बदल गया। एक बार आंखें जमते ही उन्होंने साउथ अफ्रीकी गेंदबाजों पर हमला बोल दिया और कुछ ही ओवरों में अपने स्कोर को शतक में बदल दिया।
युवा ओपनर की नई शुरुआत
यशस्वी का यह शतक सिर्फ रन नहीं, बल्कि आत्मविश्वास की नई शुरुआत है। चौथे ही वनडे मैच में शतक जमाना किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि है। उनकी यह पारी बताती है कि वह कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य रखकर मैच को अपने पक्ष में मोड़ सकते हैं। इस प्रदर्शन के बाद उनका स्थान और मजबूत होगा और आने वाले समय में वह भारत की वनडे टीम की ओपनिंग लाइनअप में अहम भूमिका निभाते नजर आ सकते हैं।